खरसिया। श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्याधाम से रामकथा के लिए पधारीं साध्वी उमाजी ने कहा कि जैसे बिना हवा और पानी के जीवन नहीं हो सकता वैसे ही धर्म के बिना भी जीवन असंभव है। भारतीय समाज में जो भी पर्यटक आते हैं वे भारत को और हमको धर्म की वजह से ही जानते हैं। धर्म का सीधा सा अर्थ है शासन, धर्म हमें अपने ऊपर शासन करना सीखना है, अनुशासित बनता है।
अल्पआयु 12 वर्ष से राम कथा कह रहीं उमाजी ने कहा कि मेरी जीवन का उद्देश्य यही है कि जितने भी सनातनी हैं, उन सब को जोड़ते चलें। वहीं कहा कि यदि हम अपने सनातन संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहेंगे तो कोई मतवाला हाथी भी हमें हिला नहीं सकता। हमारा पूरा प्रयास होगा कि भारतवर्ष की संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए हम सोए हुए हिंदुओं को जगायें। उन्होंने बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि हम जहां भी अल्पसंख्यक होते हैं वहीं हमारे साथ अन्याय होता है, इसलिए हमें अपनी संस्कृति से जुडक़र एकजुट रहना होगा। मैं अपने आप को धन्य समझती हूं कि मुझे राम कथा कहने के साथ राष्ट्र-धर्म की सेवा करने का अवसर मिला, गुरु कृपा से मुझे जो व्यासपीठ मिली है इसकी मर्यादा को रखते हुए मैं पुन: भारतवर्ष को विश्वगुरु के रूप में देखना चाहती हूं यही मेरा सपना है और यही मेरा लक्ष्य है। आप प्रेमानंदजी महाराज के पेज को फॉलो करके उनका अनुसरण करते हैं यह बहुत अच्छी बात है, परंतु यह भक्ति कुछ समय के लिए नहीं जीवन भर के लिये हो, आप उनके दिखाये मार्ग पर चलें तभी सार्थक है। सनातन धर्म से जुड़े सभी से मेरा निवेदन है कि आप अपने धर्म का पालन करते रहें और अपने बच्चों को अपनी संस्कृति तथा धर्म के बारे में बताएं, तीर्थाटन करें और श्रीराम कथा का श्रवण करें।
धर्म हमें अनुशासित बनता है, स्वयं पर शासन करना सिखाता है
श्रीराम कथा के लिए अयोध्याधाम से पधारीं उमाजी



