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NavinKadam > बिलासपुर > छत्तीसगढ़ में ढाई लाख शिक्षकों का नहीं होगा ग्रेडेशन
बिलासपुर

छत्तीसगढ़ में ढाई लाख शिक्षकों का नहीं होगा ग्रेडेशन

हाईकोर्ट से 1188 टीचर्स की याचिकाएं खारिज, कोर्ट बोला-संविलियन से पहले शिक्षा विभाग में नहीं थे

lochan Gupta
Last updated: November 27, 2025 12:27 am
By lochan Gupta November 27, 2025
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4 Min Read

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 10 साल की सर्विस के बाद क्रमोन्नति (ग्रेडेशन) की मांग करने वाले 1,188 टीचरों की पिटीशन खारिज कर दी है। इससे ढाई लाख से ज्यादा शिक्षक प्रभावित होंगे। जस्टिस एनके व्यास ने फैसला सुनाते हुए कहा कि संविलियन से पहले शिक्षाकर्मी स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन नहीं थे, इसलिए वे ग्रेडेशन के लिए पात्र नहीं माने जा सकते।
दरअसल, पंचायत विभाग में नियुक्त शिक्षाकर्मी ग्रेड-3, 2 और 1 का शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया। इसके बाद उन्हें सहायक शिक्षक (एलबी), शिक्षक (एलबी) और व्याख्याता (एलबी) के पदनाम दिए गए, लेकिन इन शिक्षकों को ग्रेडेशन का फायदा नहीं मिला। इसके खिलाफ 1188 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।
शिक्षकों का कहना था कि 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद वे ग्रेडेशन के हकदार हैं, लेकिन विभाग ने 2017 का वह आदेश लागू नहीं किया, जिसमें 10 साल बाद वेतन वृद्धि देने की बात कही गई थी। इसी वजह से शिक्षकों ने सोना साहू मामले में हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के फैसले का हवाला देते हुए ग्रेडेशन की मांग की थी।
संविलियन से पहले शासकीय सेवक नहीं थे
इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से बताया गया कि याचिकाकर्ता शिक्षाकर्मी पहले ग्रेड-3/सहायक शिक्षक (पंचायत) के रूप में पंचायत राज अधिनियम, 1993 के तहत नियुक्त थे और उनकी सेवा और नियंत्रण जनपद पंचायत के अधीन था। इसलिए संविलियन से पहले उन्हें राज्य सरकार का नियमित कर्मचारी नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षक 10 मार्च 2017 को जारी सर्कुलर में ग्रेडेशन के लिए जरूरी शर्तें पूरी नहीं करते, क्योंकि उनकी सेवा अवधि केवल 1 जुलाई 2018 यानी संविलियन की तारीख से ही गिनी जा सकती है। इसलिए वे 10 साल की अनिवार्य सेवा पूरी नहीं करते। हाईकोर्ट ने सरकार के इन तर्कों को सही माना है।
संविलयन नीति में स्पष्ट है किसी भी लाभ का दावा नहीं किया जा सकता
याचिकाकर्ताओं ने अपने पक्ष में सोना साहू मामले का हवाला दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि सोना साहू केस के हालात पूरी तरह अलग हैं, इसलिए इसे आधार नहीं बनाया जा सकता। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि संविलियन नीति 30 जून 2018 में स्पष्ट है कि पहले के शिक्षाकर्मी केवल संविलियन की तारीख से ही सरकारी शिक्षक माने जाएंगे। उससे पहले वेतन वृद्धि या ग्रेडेशन का दावा नहीं कर सकते।
सरकार को 3.5 लाख से 15 लाख के बीच पेमेंट करना पड़ता
अगर ग्रेडेशन को लेकर फाइल की गई पिटीशन में टीचरों के हक में फैसला आता, तो सरकार को हर टीचर को रु 3.5 लाख से रु. 15 लाख के बीच पेमेंट करना पड़ता। क्लास 3 टीचरों को सबसे ज़्यादा पैसे मिलते, क्योंकि क्लास 3 और क्लास 2 के पे स्केल में काफी अंतर है। अगर कोई क्लास 3 टीचर 2005 में अपॉइंट हुआ था, तो नियमों के मुताबिक, वे 2015 में ग्रेडेशन के लिए एलिजिबल होते। ऐसे में, उन्हें 2015 से क्लास 2 पे मिलती। इससे उनकी सैलरी बढ़ जाती। मर्जर के बाद, यह अंतर हर महीने हज़ारों रुपए हो जाता है।
सरकार ने कहा- टीचर ग्रेडेशन के लिए एलिजिबल नहीं हैं
सरकार ने हाई कोर्ट में दलील दी कि टीचरों को सरकारी कर्मचारी के तौर पर नहीं, बल्कि पंचायत कर्मचारी के तौर पर अपॉइंट किया गया था। उनकी सर्विस कंडीशन अलग हैं। शिक्षाकर्मियों को 7 वर्ष में समयमान वेतनमान और वर्ष 2014 में समकक्ष वेतनमान दिया गया है, शिक्षाकर्मी वेतन में क्रमोन्नति के पात्र नहीं हैं।

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