रायगढ़। साहित्यिक और सांस्कृतिक धारा में एक विशेष स्थान रखने वाले तपस्वी बाबा श्री श्री सत्यनारायण जी का जीवन स्वयं में एक प्रेरक महागाथा है। कठोर तप, गहन साधना और मानवता की सेवा में रत उनका व्यक्तित्व जन-जन के लिए दीपस्तंभ रहा है। बाबा जी ने जीवन पर्यन्त समाज में नैतिकता, सद्भाव और आत्मशक्ति के संदेश का प्रसार किया। उनकी जीवटता और आध्यात्मिक तेज ने असंख्य लोगों को जीवन की राह दिखाई।
पुस्तक- श्रद्धा और साहित्य का अद्भुत संगम
बाबा जी के तपस्वी जीवन, जीवन-दर्शन और समाजसेवा को समर्पित छंदबद्ध साझा संकलन ‘हठयोगी श्री श्री बाबा सत्यनारायण जी’ केवल साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि भक्ति, भाव और श्रद्धा का जीवंत दस्तावेज़ है। इसमें संकलित रचनाएँ विभिन्न रचनाकारों की हृदय-गर्भित अनुभूतियों की अभिव्यक्ति हैं, जो पाठक को सीधे बाबा जी की आध्यात्मिक आभा से जोड़ देती हैं। इस अमूल्य संकलन का संपादन डॉ. आशा मेहर ‘किरण’, डॉ. सुधा देवांगन ‘शुचि’ और डॉ. अजय पटनायक ‘मयंक’ के कुशल मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। तीनों संपादकों ने इस कृति को केवल पुस्तक न रहकर एक आध्यात्मिक साहित्यिक स्मारक बनाने में अपनी संपूर्ण ऊर्जा और साहित्य-प्रेम समर्पित किया।
लोकार्पण समारोह- एक अविस्मरणीय क्षण
बाबा धाम के पावन प्रांगण में हुए इस भव्य लोकार्पण समारोह में रायगढ़ महापौर जीवर्धन चौहान और पूजनीय माता हंसामति देवी ने अपने कर-कमलों से संकलन का अनावरण किया। इस अवसर पर मंच पर बाबा धाम समिति के सचिव रमेश बेहरा, संरक्षक अशोक कुमार लांबा, संचालक मुकेश शर्मा, अधिवक्ता बाबूलाल मेहर, पार्षद मुक्ति प्रसाद एवं आशीष शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
‘काव्य वाटिका सम्मान’
कार्यक्रम के दौरान साहित्य जगत में अपने विशिष्ट योगदान और शिक्षण क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सुप्रसिद्ध लेखिका एवं शिक्षिका श्रीमती रश्मि वर्मा को ‘38 बॉ काव्य वाटिका सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनकी साहित्यिक उपलब्धियों और सामाजिक योगदान की सराहना करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। भावपूर्ण काव्य-पाठ- श्रद्धा का उत्सव माता हंसामति देवी के सानिध्य में कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह था जब मंच से बाबा जी की महिमा में सरस एवं भक्ति-रस से परिपूर्ण कविताएँ उनकी माता हंसामति देवी को सुनाई गईं। जगदीश मेहर, रामगोपाल शुक्ल, डॉ. रुक्मिणी सिंह राजपूत, डॉ. गीता उपाध्याय ‘मंजरी’, अरुणा साहू, डॉ. सुधा पण्डा ‘प्रज्ञा’, डॉ. सुधा देवांगन ‘शुचि’, डॉ. आशा मेहर ‘किरण’, साधना मिश्रा, सुशीला साहू, लिशा पटेल ‘दिव्य’, धनेश्वरी देवांगन ‘धरा’, रजनी वैष्णव, आरती मेहर, भारती महंत, सुखदेव सिंह राठिया ‘बनगइहां’, सीमा पटेल, सुषमा पटेल, वसुंधरा पटेल, कृष्णा पटेल, स्वाति पड्या, मनोहर दास वैष्णव, पूर्णिमा चौधरी ‘पिंकी’ और डॉ. गुलशन खम्हारी ‘प्रदुम्न’ ने अपनी रचनाओं से वातावरण को भक्ति और साहित्यिक रसधारा में सराबोर कर दिया।
अतिथियों के विचार- साहित्य और सेवा का संकल्प
जीवर्धन चौहान- ‘रायगढ़ की साहित्यिक परंपरा गौरवशाली है। जब भी साहित्यकारों को मेरी आवश्यकता होगी, मैं तन-मन-धन से सहयोग करूंगा और साहित्य के संवर्धन हेतु सदैव समर्पित रहूंगा ऐसा कहकर उन्होंने साहित्य भवन के लिए 20 लाख अनुदान देने का आश्वासन दिया’ रमेश बेहरा- ‘यह संकलन रायगढ़ के साहित्यकारों के अंतर्मन से निकला भावस्रोत है, जो प्रशंसनीय है।’ बाबूलाल मेहर- ‘सभी रचनाकारों को इस विशिष्ट संकलन हेतु हृदय से बधाई।’ अशोक कुमार लांबा- ‘हम इस संकलन को जन-जन तक पहुँचाने का भरपूर प्रयास करेंगे।’ डॉ. आशा मेहर ‘किरण’- इस संकलन की महत्ता को व्यापक स्तर तक पहुँचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
आध्यात्मिक-साहित्यिक संगम
पीताम्बर देवांगन एवं देवांग पांड्या,राकेश देवगन,दीपक मेहर,कल्याणी मुखर्जी,सुमित्रा राठिया,रमेश डनसेना,नीरज चंदेल,राजेश प्रसाद,नीलांबर,संतोष,समेत का सहयोग रहा सभी बाबा धाम समिति के सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा और भी बढ़ा दी। यह आयोजन केवल एक पुस्तक लोकार्पण न होकर एक ऐसा अवसर बन गया जहाँ साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म एक ही मंच पर पल्लवित और पुष्पित हुए। कार्यक्रम के दौरान सभी साहित्यकारों को स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अंत में मनोज श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, रचनाकारों और उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। पूरे कार्यक्रम का संयमित, प्रभावी और गरिमामय संचालन डॉ. अजय पटनायक ‘मयंक’ ने किया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।
महापौर चौहान का संकल्प- ‘साहित्य संवर्धन के लिए सदैव समर्पित रहूंगा’
बाबा धाम में हुआ ‘हठयोगी श्री श्री बाबा सत्यनारायण जी’ काव्य संकलन का लोकार्पण
