रायगढ़. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्टाइपेंड से संबंधित 17 सूत्रीय मांगों को लेकर इंटर्न डॉक्टरों ने चरणबद्ध प्रदेशव्यापी आंदोलन आरंभ कर दिया है। एमबीबीएस इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और बॉन्डेड जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार को ‘ब्लैक रिबन’ बांधकर अपना विरोध जताया। उन्होंने अस्पताल परिसर में एक सांकेतिक रैली भी आयोजित की, जिसके माध्यम से उन्होंने अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी लंबित मांगें नहीं मानीं, तो वे अपनी सेवाओं को बाधित करने पर मजबूर होंगे। इसके तहत, 21 सितंबर से ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी जाएंगी और यदि फिर भी समाधान नहीं निकला, तो 23 सितंबर से आपातकालीन सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी। डॉक्टरों ने सरकार को इन मांगों पर निर्णय करने के लिए चार दिनों की मोहलत दी है। तय रूपरेखा के अनुसार, यदि इस निर्धारित अवधि में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता है, तो 21 सितंबर से प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें पूरी न होने पर, 23 सितंबर से सभी प्रकार की आपातकालीन सेवाओं को भी बंद कर पूर्ण कार्यबहिष्कार करने का ऐलान किया गया है। डॉक्टरों ने अपनी बात दोहराते हुए कहा है कि वे मरीजों को किसी भी तरह से परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन लंबे समय से चली आ रही इन गंभीर समस्याओं के कारण उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर विवश होना पड़ा है।
स्टाइपेंड व बुनियादी संसाधन प्रमुख
आंदोलनकारी डॉक्टरों के 17 सूत्रीय मांग पत्र में एमबीबीएस इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी, पीजी रेजिडेंट और बॉन्डेड जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के वेतन में वृद्धि प्रमुखता से शामिल है। इसके अलावा डीएम और एमसीएच सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में संशोधन की भी मांग की गई है। मांग पत्र में सरकारी अस्पतालों में बेहतर चिकित्सा संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है, ताकि विशेषज्ञ डॉक्टर शासकीय सेवाओं में बने रहें और मरीजों को उच्चस्तरीय उपचार मिल सके।
वादाखिलाफी का आरोप
डॉ. राधेश्याम ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री द्वारा स्टाइपेंड बढ़ाने के वादे पर अमल नहीं किया गया, जिससे डॉक्टरों में गहरा रोष है। साथ ही कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था केवल विज्ञापनों और पोस्टरों तक सीमित रह गई है, जबकि जमीनी स्तर पर डॉक्टरों के साथ लगातार अनदेखी हो रही है। साथ ही डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद शासन से टकराव का नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार और अपने हक की बात रखने का है। हालांकि इस आंदोलन के कारण मरीजों को होने वाली किसी भी असुविधा की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।



