खरसिया। कैलाश शर्मा। खरसिया नगर की पवित्रपावन भूमि पर श्रीमद्भागवत की रसधारा बह रही है, जिसमें संपूर्ण क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में सराबोर है। खरसिया में बहु झोलरी वाले गर्ग परिवार द्वारा आयोजित विशाल श्रीमद् भागवत कथा एवं ज्ञान यज्ञ समारोह के पंचम दिवस पर कथा पंडाल भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण रहा। इस अवसर पर भगवान श्री गिरिराज जी महाराज का भव्य पूजन कर 56 भोग अर्पित किए गए।
कथा के प्रारंभ में पूज्य व्यासपीठ से आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी ने दीप प्रज्ज्वलित कर विश्वकर्मा पूजा तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने व जन्मदिन पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस अवसर पर भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय कथा श्रवण करने पहुंचे और आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया।
पंचम दिवस की कथा के प्रमुख प्रसंग
पूतना मोक्ष एवं प्रभु के नेत्र बंद करने का रहस्य – आचार्य श्री ने बताया कि जब पूतना विष लगाकर आई तो प्रभु ने नेत्र बंद कर लिए। इसका पहला कारण विष के निवारण हेतु भगवान शिव का ध्यान करना था, और दूसरा यह कि नेत्र खोलने से पूतना के प्रति प्रीति न हो जाए, जिससे उसका उद्धार रुक सकता था। पूतना पूर्व जन्म में राजा बलि की पुत्री रत्नमाला थी। बाल लीलाएं एवं नामकरण संस्कार – शकटासुर व तृणावर्त वध की कथा के साथ-साथ गर्गाचार्य जी द्वारा श्री कृष्ण और श्री बलराम जी के नामकरण की दिव्य कथा सुनाई गई।
गोवर्धन लीला एवं छप्पन भोग भजनों की रसधारा
आचार्य श्री ने इंद्र का मान-मर्दन कर तर्जनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण करने की कथा सुनाते हुए बताया कि गिरिराज जी और बांके बिहारी जी में कोई भेद नहीं है। उन्होंने 56 भोग के आध्यात्मिक रहस्य पर भी प्रकाश डाला। कथा के दौरान मुझे रास आ गया है तेरे दर पर सर झुकाना, आज मेरे अंगना में आओ नंदलाल, छोटी छोटी गैंया छोटे छोटे ग्वाल, तथा श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो जैसे मधुर भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करने लगे। आगामी कथा प्रसंग- कथा के छठवें दिवस प्रभु श्री कृष्ण के विवाह महोत्सव और रुक्मिणी मंगल की भव्य कथा का वर्णन किया जाएगा।



