खरसिया। जिले के खरसिया में सबसे ज्यादा अवैध प्लाटिंग और ईडब्ल्यूएस भूमि घोटाले के मामले अभी चल ही रहे हैं कि इसी बीच खरसिया शहर में धनबल और बाहुबल के दम पर कीमती जमीनों को हथियाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। हाईवे किनारे एनएच से लगी प्राइम लोकेशन पर वार्ड नंबर 18 की बेशकीमती भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर दो पक्षों के बीच उपजा विवाद अब राजस्व अदालत से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक गरमा गया है। एक पक्ष चक्रधारी परिवार का आरोप है कि दर्जनों असामाजिक तत्वों और जेसीबी मशीन की मदद से उनकी पुरानी बाउंड्रीवॉल तथा बने हुए मकान और बिजली मीटर को ध्वस्त कर रातों रात प्रीकास्ट दीवार खड़ी कर कब्जा कर लिया गया।
चक्रधारी परिवार द्वारा सीएम हेल्पलाइन, कलेक्टर रायगढ़, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व खरसिया और पुलिस चौकी में की गई शिकायत तथा मीडिया में प्रस्तुत किए गए सभी शिकायतों और आवेदनों के अनुसार, विवादित स्थल वार्ड 18 में संस्कार हॉस्पिटल के सामने स्थित है। प्रार्थी चंद्रमणि कुम्हार चक्रधारी परिवार का आरोप है कि उनकी पैतृक स्वामित्व वाली भूमि जिसका जिस पर उनका विगत पचास वर्षों से भी अधिक समय से कब्जा है, उस भूमि पर 23/08/26 की रात को खरसिया निवासी राजेश अग्रवाल ने 50-60 लोगों के साथ बिना नंबर प्लेट वाली जेसीबी लगाकर धावा बोला। पहचान छिपाने के लिए जेसीबी चालक तक का मुंह मास्क से ढका हुआ था। विरोध करने पर परिवार को मारपीट व जान से मारने की धमकी दी गई। देखते ही देखते वर्षों पुराने मकान, मुख्य गेट और विद्युत मीटर लगे परिसरों को तोडक़र पूरी जमीन को प्रीकास्ट दीवारों से घेर दिया गया।
विवादित भू-खंडों का विवरण
प्रार्थी (चंद्रमणि कुम्हार चक्रधारी परिवार) खसरा नंबर 578/22, 578/24, 578/25, 578/26, 578/30, 578/33 और 578/42 (कुल रकबा 1.446 हेक्टेयर)। आरोपी पक्ष (रश्मि देवी अग्रवाल पति राजेश अग्रवाल) खसरा नंबर 578/3 (रकबा 0.2600 हेक्टेयर), जिसे उन्होंने शकुंतला, गगन, सुजीत, मनहरण आदि से क्रय करना बताया है। चक्रधारी परिवार का आरोप है कि विक्रेता पक्ष और खरीदार ने मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए हैं और अपनी पीछे की (आड़ी-तिरछी) जमीन को एनएच किनारे दर्शाने के लिए चक्रधारी परिवार की हाईवे फ्रंट वाली जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है।
प्रशासनिक हिदायत दरकिनार
घटना के तुरंत बाद पीडि़त पक्ष ने खरसिया चौकी में शिकायत दर्ज कराई, खरसिया पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों को पुलिस चौकी में तलब किया तथा सीमांकन (नापजोख) पूरा होने तक विवादित स्थल पर किसी भी प्रकार के आवागमन और निर्माण कार्य पर सख्त रोक लगा दी। इसके बावजूद आरोपी पक्ष ने पुलिस की हिदायतों को ठेंगा दिखाते हुए रविवार को भी निर्माण जारी रखा। प्रार्थी चक्रधारी परिवार ने बताया कि मौके पर 20 से 30 संदिग्ध युवकों का पहरा बैठा दिया गया, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। प्रार्थी चक्रधारी परिवार जमीन से संबंधित संपूर्ण दस्तावेज मीडिया के सामने पेश करते हुए यह भी दावा किया कि उक्त भूमि के एक हिस्से पर माननीय उच्च न्यायालय का स्थगनादेश भी प्रभावी है, किंतु इसके बाद भी जमीन का स्वरूप बदलने का प्रयास जारी रहा, जो प्रशासनिक तंत्र की बेबसी या मिलीभगत पर सवाल खड़े करता है। मामला तूल पकडऩे और कलेक्टर तक लिखित शिकायत पहुंचने के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया है। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एसडीएम खरसिया प्रवीण भगत ने मामले को संज्ञान में लेते हुए स्वामित्व प्रमाणीकरण के संबंध में 164 के तहत नोटिस जारी किए हैं। एसडीएम ने राजस्व अमले की टीम गठित कर उन्हें मौके पर जाकर भूमि का निष्पक्ष सीमांकन करने का आदेश जारी कर दिया है।
नक्शों में हेराफेरी और राजस्व व्यवस्था पर उठते सवाल
खरसिया क्षेत्र में जमीनों के सीमांकन को लेकर अक्सर उठने वाले विवादों ने अब राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। डिजिटलाइजेशन के बाद भी धांधली सरकार भले ही राजस्व अभिलेखों के डिजिटलाइजेशन का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर पटवारी स्तर से नक्शों में हेराफेरी के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
फ्रंट की जमीन पर नजर लंबी कानूनी प्रक्रिया का फायदा
भू-माफिया पीछे की जमीनों को मेन रोड या हाईवे किनारे दर्शाने के लिए सरकारी नक्शों और प्रतिवेदनों में बदलाव का खेल खेल रहे हैं। वास्तविक मालिक जब तक अदालतों के चक्कर काटता है, तब तक बाहुबल के दम पर जमीन की स्थिति बदलकर उसे बेदखल कर दिया जाता है। वार्ड 18 का यह मामला रायगढ़ जिले में भू-माफियाओं के बढ़ते हौसले और आम नागरिकों की असुरक्षित होती संपत्ति का ज्वलंत उदाहरण बन चुका है। अब देखना यह होगा कि राजस्व टीम का सीमांकन चक्रधारी परिवार को न्याय दिला पाता है या धनबल बाहुबल का खेल फिर हावी होता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सच में किसी की जमीन कब्जाई गई है, पीडि़त होने का दावा किया जा रहा है। पेश किए गए दोनों पक्षों के दावों की सच्चाई अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा की गई निष्पक्ष जांच और उनके दिए द्वारा दिए गए फैसले के बाद पता चल पाएगी। इस संबंध में एसडीएम प्रवीण भगत ने बताया कि 164 के तहत मामला दर्ज किया गया है, उपरोक्त भूमि पर हमारे द्वारा स्टे ऑर्डर जारी करते हुए सीमांकन के लिए एक टीम गठित की गई है। बीच में छुट्टियों की वजह से सीमांकन नहीं हो पाया है। प्रकरण में संबंधित पक्ष को अपने सम्पूर्ण दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए 164 के तहत आदेश जारी किया गया है।



