रायगढ़। कला, संगीत और नृत्य की विविध विधाओं को एक मंच पर साकार करने वाला 41वां चक्रधर समारोह 16 सितंबर की शाम देश-प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का साक्षी बनेगा। समारोह में शाम 4.30 बजे से रात 11.30 बजे तक लोक संगीत, भरतनाट्यम, कथक और छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां होंगी। राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ स्थानीय एवं प्रदेश के कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन कर रायगढ़ की सांस्कृतिक धरती को सुर, ताल और नृत्य की रंगीनियों से सराबोर करेंगे।
लोक संगीत से होगी सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत शाम 4.30 बजे से 6 बजे तक जांजगीर के नीलेश जोगी म्यूजिकल ग्रुप के 7 कलाकारों की लोक संगीत प्रस्तुति से होगी। इसके बाद शाम 6 से 6.15 बजे तक रायगढ़ की स्थानीय कलाकार डॉ. दीपिका सरकार भरतनाट्यम की शास्त्रीय प्रस्तुति देंगी।
कथक की मनोहारी प्रस्तुतियों से सजेगा मंच
शाम 6.15 से 7 बजे तक कथक नृत्य की दो एकल प्रस्तुतियां होंगी। इंदौर की जयात्रा दवे शाम 6.15 से 6.30 बजे तक तथा रायगढ़ की सुश्री विभूति शर्मा शाम 6.30 से 7 बजे तक कथक की प्रस्तुति देकर दर्शकों को शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों और भाव-सौंदर्य से रूबरू कराएंगी।
35 कलाकारों का दल बिखेरेगा छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के रंग
शाम 7 से 8 बजे तक गरियाबंद के भूपेंद्र साहू एवं 35 कलाकारों का दल छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति देगा। पारंपरिक लोकधुनों और नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और जनजीवन की जीवंत झलक देखने को मिलेगी। इसके बाद रात 8.10 से 9.10 बजे तक दिल्ली से पधारीं मऊमाला नायक अपने 5 सदस्यीय दल के साथ कथक की प्रस्तुति देंगी।
डॉ. यास्मीन सिंह के समूह की कथक प्रस्तुति बनेगी आकर्षण
रात 9.20 से 10.20 बजे तक दिल्ली की प्रसिद्ध नृत्यांगना डॉ. यास्मीन सिंह एवं 12 कलाकारों का समूह सामूहिक कथक प्रस्तुति देगा। लय, ताल, भाव और पद-संचालन के सुंदर समन्वय से सजी यह प्रस्तुति समारोह की प्रमुख प्रस्तुतियों में शामिल होगी।
लोक कला की प्रस्तुति के साथ होगा सांस्कृतिक संध्या का समापन
रात 10.30 से 11.30 बजे तक दुर्ग की पायल साहू एवं 35 कलाकारों का दल लोक कला एवं संस्कृति की जीवंत प्रस्तुति देगा। विविध लोक विधाओं और पारंपरिक रंगों से सजी यह प्रस्तुति सांस्कृतिक संध्या का समापन करेगी।



