सारंगढ़। नव गठित जिले में प्रशासन की आंख व कान बनकर जनसम्पर्क की जिम्मेदारी निभाना आसान काम नहीं होता। संसाधन सीमित हों, जिम्मेदारियां व्यापक हों और हर दिन बदलती प्रशासनिक प्राथमिकताओं के बीच शासन की योजनाओं, उपलब्धियों और सूचनाओं को समय पर मीडिया तक पहुंचाना हो, तो अधिकारी की कार्य क्षमता के साथ उसका व्यवहार और संबंध भी उतने ही महत्वपूर्ण हो जाते हैं। सारंगढ़ -बिलाईगढ़ जिले में वर्षों तक सहायक जनसम्पर्क अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे देव राम यादव ने इस जिम्मेदारी को केवल सरकारी दायित्व की तरह नहीं, बल्कि एक भरोसे की जिम्मेदारी की तरह निभाया।
19 अगस्त को शासन ने 22 जन सम्पर्क अधिकारी के स्थानांतरण की सूची जारी की। इसमें सारंगढ़ – बिलाईगढ़ के सहा. जनसम्पर्क अधिकारी देवराम यादव का नाम महासमुंद स्थानांतरण के लिए सामने आया। आदेश सामान्य था, लेकिन उसके पीछे छूट रहा 3 वर्षों का रिश्ता सामान्य नहीं था। यही वजह रही कि तबादले की खबर मिलते ही स्थानीय मीडिया जगत और उनके शुभचिंतकों के बीच सहज ही एक उदासी दिखाई दी। 3 वर्षों के कार्यकाल में पी आर ओ यादव ने 4 कलेक्टरों के कार्य काल पूर्ण तक कार्य करने का कुशल अनुभव हासिल किया। जिले के जन सम्पर्क का लगभग पूरा दायित्व संभालते हुए उन्होंने प्रशासनिक गतिविधियों, योजनाओं और महत्वपूर्ण सूचनाओं पर लगातार नजर रखी। कलेक्टर की मंशा के अनुरूप समाचारों और सूचनाओं को समयबद्ध तरीके से मीडिया तक पहुंचाना, तथ्यों की शुद्धता बनाए रखना और लेखन में सहजता व स्पष्टता रखना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा पर देवराम यादव की पहचान केवल प्रेस नोट तैयार करने वाले अधिकारी की नहीं बनी। उन्होंने प्रशासन और मीडिया के बीच विश्वास और संवाद का ऐसा पुल तैयार किया, जिस पर दोनों ओर से सहज आवाजाही बनी रही। स्थानीय पत्रकारों की जरूरतों को समझना, उनकी समस्याओं में सहयोग करना और कई बार पद की औपचारिक सीमाओं से आगे बढक़र उनके सम्मान की रक्षा के लिए खड़ा होना उनके व्यक्तित्व का वह पक्ष रहा, जिसे मीडिया के लोगों ने महसूस किया।
विभागीय काम काज का दबाव हो या दिनभर की भागदौड़, उनकी वाणी में संतुलन और चेहरे पर बनी रहने वाली वह हल्की-सी मुस्कान उनके व्यक्तित्व की खास पहचान रही। शायद यही सहजता थी जिसने उन्हें केवल अधिकारियों और पत्रकारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सामाजिक जीवन में भी उनका दायरा लगातार बढ़ता गया।
जिले के साथ उनका रिश्ता केवल कार्यालय तक सीमित नहीं रहा। स्थानीय सियासत, प्रशासन, मीडिया और सामाजिक सरोकारों को समझते हुए उन्होंने अपनी भूमिका को बेहद संतुलित रखा। यही कारण रहा कि जिले में पदस्थ रहे कलेक्टरों के बीच भी वे विश्वसनीय अधिकारी के रूप में पहचाने गए। उनसे मिलने वाला शायद ही कोई व्यक्ति उनके सहज व्यवहार और आत्मीयता से प्रभावित हुए बिना रहा हो। सरकारी सेवा में तबादला कार्यप्रणाली का हिस्सा है। एक अधिकारी एक जगह से दूसरी जगह जाता है और नई जिम्मेदारी संभालता है। लेकिन कुछ स्थान ऐसे होते हैं, जहां अधिकारी की भूमिका महज पदनाम से आगे बढक़र रिश्तों में बदल जाती है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ में देवराम यादव का 3 साल का कार्यकाल कुछ ऐसा ही रहा। इसलिए महासमुंद स्थानांतरण उनके लिए नई जिम्मेदारी की शुरुआत जरूर है, लेकिन सारंगढ़ को छोडऩा एक आत्मीय घर से विदाई लेने जैसा भी है।
महासमुंद अब उन के अनुभव व कार्य शैली का नया साक्षी बनेगा। वहां भी जनसम्पर्क की जिम्मेदारी को वे उसी गंभीरता, सहजता और विश्वसनीयता के साथ निभाएंगे, इसकी उम्मीद स्वाभाविक है। लेकिन सारंगढ़ – बिलाईगढ़ में उनके साथ काम करने वाले और उनसे आत्मीयता रखने वाले लोगों के मन में एक कसक जरूर रहेगी—एक अच्छे अधिकारी का तबादला हुआ है, लेकिन उससे कहीं अधिक एक अपने से व्यक्ति की विदाई हुई है। देव राम यादव के लिए यह विदाई अंत नहीं, एक नए अध्याय की शुरुआत है। महासमुंद में नई जिम्मेदारी के लिए उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं और मिलती रहेंगी। मगर सारंगढ़-बिलाईगढ़ की स्मृतियों में वे शायद लंबे समय तक उस मुस्कुराते चेहरे वाले पीआरओ के रूप में याद किए जाते रहेंगे, जिसने खबरों के साथ-साथ रिश्तों को भी पूरी ईमानदारी से संभाला।
तबादला नहीं, देवराम यादव की आत्मिक विदाई, चार कलेक्टरों के साथ निभायी जिम्मेदारी



