रायगढ़। जिले के मुख्य मार्गों पर भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार, ढाबों के आसपास पसरा अतिक्रमण, बेतरतीब पार्किंग और सडक़ों पर घूमते मवेशियों का जमावड़ा अब जानलेवा साबित हो रहा है। गेरवानी स्थित वीआईपी ढाबा के सामने मुख्य मार्ग पर एक दर्दनाक सडक़ हादसे में 5 गायों की कुचलकर मौत हो गई। हादसे ने सडक़ सुरक्षा, मवेशी प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि बीती रात रायगढ़-घरघोड़ा मार्ग के गेरवानी स्थित व्हीआईपी ढाबा के निकट एक तेज रफ्तार भारी वाहन ने सडक़ पर बैठे मवेशियों को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में सडक़ पर बैठे पांच मवेशियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, रायगढ़-घरघोड़ा एनएच पर भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार एक बड़ी समस्या बनी हुई है। रात के समय अक्सर मवेशी सडक़ पर आ जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो रात के समय अंधेरा होने के कारण कई बार वाहन चालकों को नजर नहीं आता है कि सडक़ पर मवेशी बैठे हैं, साथ ही कई बार वाहनों की रफ्तार अधिक होने के कारण जब तक वाहन पर काबू पाते हैं, तब तक मवेशी उनके चपेट में आ जाते हैं, इस कारण न चाहत हुए भी बेजुबानों की मौत हो जा रही है। वहीं मंगलवार को सुबह जब आसपास के लेाग सडक़ पर पहुंचे तो एक साथ पांच मवेशियों की मौत को देख स्तभब्त रह गए। इससे ेदेखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ लग गई। साथ ही लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है जब इस मार्ग पर मवेशी सडक़ हादसों का शिकार हुए हैं। वहीं बताया जाता है कि विगत चार-पांच दिनों से लगातार बारिश होने के कारण रात के समय सूखा जगह देखकर मवेशी सडक़ पर आ जा रहे हैं और वहीं पर अपना आशियाना बना ले रहे हैं। ऐसे में इन मवेशियों को संरक्षित करने की दरकार है, ताकि इस तरह के हादसे को रोका जा सके। साथ स्थानीय निवासियों ने पुलिस और परिवहन विभाग से अपील की है कि वे भारी वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण करें और रात के समय सडक़ों पर गश्त बढ़ाएं ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
रात होते ही लग जाता है जमावड़ा
उल्लेखनीय है कि इन दिनों रात होते ही लाखा-गेरवानी मार्ग पर जगह-जगह मवेशियां का जमावड़ा लग जा रहा है। साथ ही इस मार्ग पर कई ढाबा भी संचालित है, जिसके चलते भोजन की तलाश में भी मवेशी अक्सर पहुंचते है। जो भोजन के बाद सडक़ पर बैठकर आराम करते हैं। ऐसे में यह मार्ग यह मार्ग औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही के लिहाज से बेहद व्यस्त है। ऐसे में सडक़ के बीच मवेशियों का जमावड़ा वाहन चालकों और राहगीरों दोनों के लिए गंभीर खतरा बन गया है।
अंधेरा व रफ्तार मुख्य कारण
इस संबंध में लोगों की मानें तो लाखा से तराईमाल तक सडक़ पर रात होते ही अंधेरा जा छा जाता है, साथ ही वाहन चालक भी इस व्यस्तम मार्ग से जल्दी निकलने के लिए वाहनों को तेज गति से चलाकर जाते हैं, इस कारण मवेशी हादसे का शिकार हो रहे हैं। साथ ही आसपास के ग्रामीण मवेशियों को घर में रखने की बजाय खुला छोड़ देते हैं, यह मुख्य कारण है, ऐसे में पशुपालकों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
कीचड़ से बचने सडक़ पर पहुंच रहे मवेशी
बारिश के मौसम में सडक़ के दोनों ओर कीचड़ एवं पानी जमा होने से मवेशी भी परेशान हो जा रहे हैं, इसके चलते मवेशी सूखा जगह देख कर सडक़ को ही आशियाना बना रहे हैं। जो हादसे का मुख्य कारण बन रहा है। ऐसे में मवेशियों के गले में रेडियमयुक्त पट्टी के साथ उनको सडक़ से भगाने की दरकार है।



