खरसिया। खरसिया नगर की धन्य धरा पर श्री श्याम कुटुम्ब द्वारा श्री श्याम बिहारी मंदिर के में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ 05 अगस्त से 12 अगस्त 2026 तक आयोजित है। व्यासपीठ पर विराजमान वृन्दावन निवासी प्रभाकर कृष्ण जी महाराज अपनी मधुरवाणी से भक्तों को भागवत कथा का रसपान से अमृत रूपी कथा में डूबकी करा रहे है ।
नगर की विख्यात धार्मिक संस्था श्री श्याम कुटुम्ब द्वारा 05 अगस्त से श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का भव्य आयोजन श्री श्याम बिहारी मंदिर में किया गया जिसके तहत श्रीमद् भागवत कथा में छठवे दिवस 10 अगस्त को श्री श्याम बिहारी मंदिर में आज मुख्य जजमान श्रीमति सम्पति देवी – रजेन्द्र अग्रवाल (के.बी.) द्वारा विधि विधान से पूजन के पश्चात भागवत कथा के छठवे दिवस भागवत कथा की आरती करने के पश्चात प्रारंभ की गयी । वृन्दावन से पधारे प्रभाकर कृष्ण जी महाराज द्वारा श्रीमद् भागवत कथा के छठवे दिवस की कथा में गोपी उद्धव संवाद का विस्तारपूर्वक महाराज श्री द्वारा बताया गया गोपी उद्धव संवाद को भक्तों ने उत्साहपूर्वक सुनकर भाव विभोर हो गए श्रीमद् भागवत कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज जी द्वारा रुकमणी मंगल विवाह का प्रसंग के बारे में भक्तों को अवगत कराया वही भगवान श्री कृष्ण का विवाह रुकमणी के साथ जीवंत झांकी के माध्यम से किया गया रुकमणी मंगल के लिए श्री श्याम बिहारी मंदिर से भगवान श्रीकृष्ण की बारात बैंड बाजा आतिशबाजी एवं रथ पर सवार भगवान श्री कृष्ण अपने भक्तों के के संग कथा स्थल तक बरातियों अपनी मस्ती में नाचते गाते झूमते हुए पहुंचे भगवान श्रीकृष्ण की बारात कथा स्थल पहुंचने के पश्चात रुक्मणी एवं श्री कृष्ण की जयमाला का कार्यक्रम किया गया संपूर्ण पंडाल में भरे भक्तों द्वारा रुकमणी मंगल विवाह का आनंद खूब जोर शोर से नाचते गाते हुए लिया श्रीमद् भागवत कथा में भगवान की जीवन की झांकियां के दर्शन करने के पश्चात आरती कर सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया । भगवान श्री कृष्ण के गुरुकुल की कथा सुनाते हुए बोले भगवान श्री कृष्ण 64 दिनों में 64 प्रकार की विधाएं प्राप्त किया और गुरु दक्षिणा में अपने गुरु पुत्र को यमपुरी से लेकर के गुरु मां को समर्पित किया जिसे गुरु सांदीपनि ने आशीर्वाद दिया की आपने जो भी विद्या ग्रहण की है वह आपको जीवन पर्यंत कंठस्थ रहेंगे ऐसा आशीर्वाद पाकर के भगवान पुन: मथुरा को आए एक दिन मां देवकी ने भगवान की थाली में मक्खन और मिश्री रख दिया मक्खन देख कर के भगवान को बृज की याद आई उसमें मां यशोदा बाबा नंद और शाखा ग्वाल बाल एवं जितनी भी गोपियां थी उनकी याद भगवान को सताने लगी उद्धव जी से भगवान ने कहा कि है उद्धव जी आप पत्र लेकर के ब्रज चले जाओ और उनका समाचार ले करके आप आओ उदय जी को अपने ज्ञान का बहुत घमंड था भगवान ने गोपी गांव के पास भेज करके उनके घमंड को चोर करवाया अंतत: आगे चलकर के जरासंध ने मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया 17 वीं बार भगवान कृष्ण वहां से भाग करके द्वारिकापुरी में पहुंच गए वहां जाकर के उन्होंने द्वारकापुरी का निर्माण किया और भगवान बलराम जी का रेवती जी के साथ विवाह हुआ इसके पश्चात भगवान श्री कृष्ण के लिए रुकमणी जी का पत्र आया पत्र पड़वा करके भगवान श्री कृष्ण ने अपने सारथी को लेकर के कुंदनपुर की ओर निकल गए बलराम जी ने जब देखा कि कृष्ण कुंडलपुर जा रहे हैं रुक्मणी जी का हरण करने तो पीछे से अपनी सेना लेकर के पहुंच गए भगवान श्री कृष्ण रुक्मणी का हरण करके द्वारकापुरी ले आए कुंडलपुर के राजा भीष्मा एवं उनकी पत्नी दोनों ने आकर के द्वारकापुरी में रुक्मणी जी का हाथ भगवान श्री कृष्ण के हाथ में दिया । श्री श्याम कुटुम्ब के संस्थापक मुकेश मित्तल, अध्यक्ष विजय अग्रवाल संरक्षक कैलाश अग्रवाल प्रेस, बजरंग अग्रवाल (मालुराम) कैलाश सपना, मनोज कबुलपुरिया, पूनम अग्रवाल, हरिष षर्मा, शंकर अग्रवाल, तरूण शर्मा (बिट्टू), रमेष अग्रवाल, राजेश बंसल, विनोद ए.आर., मनोज अग्रवाल (अम्बिका), सुनिल सुल्तानिया, ऋषभ अग्रवाल (एल.आर.), निशांत अग्रवाल, कन्हैया षर्मा, संजय एसआर.एम., मनोज गर्ग, मनोज एरन, निकुंज अग्रवाल, संदीप बरेलिया, आदि सदस्य श्याम गुणगान महोत्सव को भव्यता प्रदान करने के लिए जोर शोर से लगे हुए है।
श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिवस रूकमणी विवाह का लिया भक्तों ने आनंद



