रायगढ़। स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने लंबित मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। स्वास्थ्य विभाग के निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने की मांग करते हुए कर्मचारियों ने नारेबाजी की। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर जल्द मांगें पूरी करने की मांग की।
संघ के पदाधिकारी और सदस्य मिनी स्टेडियम में एकत्र हुए, जहां मांगों के समर्थन में नारे लगाए गए। इसके बाद स्वास्थ्य कर्मचारी पैदल रैली निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के पुनरीक्षित वेतनमान लागू करने का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग पहले ही शासन को भेज चुका है। इस मांग को लेकर संघ कई सालों से लगातार प्रयास कर रहा है। पुनरीक्षित वेतनमान की मांग को लेकर साल 2023 में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन किया था। उस समय शासन ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, जिसके बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि अब तक प्रस्ताव पर कोई फैसला नहीं होने से उनमें निराशा और नाराजगी है।
प्रस्ताव पर जल्द कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में मांग की गई कि पुनरीक्षित वेतनमान संबंधी प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय लिया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि आठवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही लंबे समय से लंबित अन्य मांगों पर भी जल्द कार्रवाई की जाए।
निजीकरण और ठेका प्रथा पर रोक लगाने की मांग
स्वास्थ्य कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग को निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग से मुक्त रखने की मांग की। उनका कहना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत सभी लोगों का पंजीयन अनिवार्य करने की भी मांग रखी गई। इससे प्रशिक्षित चिकित्सकों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित होगा। फर्जी डिग्री और डिप्लोमा रखने वालों की पहचान हो सकेगी।
रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की मांग
ज्ञापन में कहा गया कि स्वास्थ्य संस्थानों में स्वीकृत पदों के अनुसार सीधी भर्ती जल्द शुरू की जाए। वर्तमान में करीब 35 से 40 प्रतिशत पद खाली हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए समान काम, समान वेतन की स्पष्ट नीति बनाने की भी मांग की गई।
जीवनदीप कर्मचारियों के लिए समान मानदेय की मांग
कर्मचारियों ने कहा कि जीवनदीप समिति के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों को अलग-अलग संस्थानों में अलग-अलग मानदेय मिल रहा है। पूरे प्रदेश में एक समान नीति लागू कर आर्थिक शोषण रोकने की मांग की गई।
स्वास्थ्य आयोग के गठन की मांग
संघ ने मांग की कि जिन संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवाएं लगातार ली जा रही हैं, उनके लिए नियमित पद स्वीकृत किए जाएं। साथ ही प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए स्वास्थ्य आयोग का गठन किया जाए।



