रायगढ़। यात्री ट्रेनों की लेट-लतीफी का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं इन ट्रेनों के लेट-लतीफी का कारण भी स्पष्ट नहीं होने से यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे में बुधवार को जहां हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस 6 घंटा तो शालीमार-ओखा एक्सप्रेस तीन घंटा देरी से रायगढ़ पहुंची थी। इससे ट्रेन में बैठे यात्री तो परेशान थे ही साथ ट्रेन के इंतजार करने वाले यात्रियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि यात्री ट्रेनों को समय पर परिचालन को लेकर रेलवे विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिसके चलते अप व डाउन दोनों दिशा की ट्रेने अपने गंतब्य तक घंटों देरी से पहुंच रही है। इसके चलते ट्रेन में बैठे यात्री तो परेशान हो ही रहे हैं, साथ ही जिन यात्रियों को ट्रेन पकडऩा है उनको भी स्टेशन में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इसको लेकर हर समय यात्री कारण जानने के लिए सहयोग काउंटर पर पहुंच रहे हैं, लेकिन सही जवाब नहीं मिलने के कारण लोगों में अक्रोश देखने को मिल रहा है। ऐसे में बुधवार को भी अप व डाउन दोनों दिशा से आने वाली लगभग सभी ट्रेने लेट से रायगढ़ पहुंची थी। इससे आरक्षण टिकट वाले यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। वहीं लेट से चलने वाली ट्रेनों में पुरी-ऋषिकेश उत्कल एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब तीन घंटा देरी से दोपहर करीब दो बजे तो ऋषिकेश-पुरी उत्कल एक्सप्रेस भी तीन घंटा देरी से दोपहर करीब 3 बजे रायगढ़ स्टेशन पहुंची थी। इसी तरह हावड़ा से चलने वाली आजाद हिंद एक्सप्रेस का समय सुबह 6 बजे है, लेकिन यह ट्रेन सुबह करीब 8.30 बजे पहुंची। वहीं शालीमार-ओखा एक्सप्रेस को भी सुबह करीब 5.30 बजे पहुंचा था, लेकिन देरी से चलने के कारण यह ट्रेन सुबह करीब 8.45 बजे रायगढ़ पहुंची थी। इसी तरह हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस का रायगढ़ पहुंचने का समय सुबह 8.30 बजे है, लेकिन लेट होने के कारण यह ट्रेन करीब छह घंटा देरी से दोपहर करीब ढाई बजे रायगढ़ स्टेशन पहुंची। इससे ट्रेन में बैठे यात्री तो परेशान हुए ही साथ ही ट्रेन के इंतजार करने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस संबंध में रेलवे अधिकारियों की मानें तो चक्रधरपुर डिविजन में जब ट्रेने पहुंचती है, तो वहां से लेट होना शुरू हो जाता है, इसके चलते रायगढ़ पहुंचते तक घंटों विलंब हो रही है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि यहां लंबे समय से लाइन निर्माण के साथ रिमाडलिंग का कार्य चल रहा है। इसके अलावा कोयला लदान भी होता है, यही कारण है कि यहां तक ट्रेनों के पहुंचने के बाद रोक-रोक कर चलाई जाती है। ऐसे में जब तक रेलवे लाइन का काम पूरी तरह से पूर्ण नहीं हो जाता तब तक इस तरह की समस्या बनी रहेगी। इसके साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि अप दिशा से आने वाले ट्रेने अपने गंतब्य तक देरी पहुंचती है, तो उसे लेट से छोड़ा जाता है, इससे दोनों तरफ से लेट हो रही है। हालंाकि बिलासपुर डिविजन में पहुंचने के बाद समय पर छोडऩे का प्रयास जारी है।
माल ढुलाई भी मुख्य कारण
रेलवे विभाग द्वारा यात्री ट्रेनों के परिचालन पर कम और माल ढुलाई को लेकर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। यही कारण है कि यात्री ट्रेनों को अलग-अलग जगहों पर रोककर गुड्स ट्रेनेां को छोड़ा जाता है। साथ ही रेलवे सूत्रों की मानें तो ज्यादातर गुड्स ट्रेने लांगहाल बनकर चल रही है, इसके चलते उसका लाइन बदलने में दिक्कत होती है। इसके चलते यात्री ट्रेनों को रोककर मालगाड़ी को निकाला जाता है। ऐसें में जब तक चौथी लाइन का पूर्ण रूप से निर्माण नहीं हो जाता, तब तक यह समस्या बनी रहने की बात सामने आ रही है।
यात्रियों को नहीं मिलती सही जानकारी
रेलवे स्टेशन पहुंचे यात्रियों का कहना था कि सहयोग काउंटर पर ट्रेनों के आने का समय तो लिखा गया था, लेकिन उधर से लेट होने के कारण हर कुछ देर में उसका समय बढ़ते जा रहा था। ऐसे में जब सही समय कब तक आएगी इसकी जानकारी पूछने पर यह बताया जा रहा था, कि उधर से ही लेट हो रही है, ऐसे में हर ट्रेन के यात्रियों को घंटों स्टेशन में बैठकर इंतजार करना पड़ रहा है।



