रायगढ़। बीती रात घरघोड़ा वन परिक्षत्र में रेलवे टैक पार कर करने के दौरान एक मादा हाथी मालगाड़ी की चपेट में आ गई, जिससे उसके पिछले हिस्से में गंभीर चोट लगने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गई थी। जिसकी सूचना मिलते ही वन विभाग और पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंच कर उपचार शुरू किया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार सोमवार को रात खरसिया से धरमजयगढ़ कोयला लेने जा रही मालगाड़ी रात करीब 10 घरघोड़ा वन परिक्षत्र के ग्राम चारमार के पास पहुंची तभी वहां से एक हाथियों का दल रेलवे ट्रैक को पार कर रहा था। इस दौरान बाकी हाथी आगे निकल गया लेकिन सबसे पीछे चल रही एक मादा हाथी को मालगाड़ी ने टक्कर मार दी। इससे हाथी के एक पैर में गहरी चोट आई और तेजी से खून निकलने लगा। हादसे की खबर फैलते ही क्षेत्र में घटना स्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जमा होने लगी, वहीं ग्रामीणों का कहना था कि घटना स्थल के आसपास पांच अन्य हाथियों का दल भी आसपास मौजूद था, इससे ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी, इससे क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया गया, साथ ही ग्रामीणों को अलर्ट किया गया कि घटनास्थल और हाथियों के झूंड से दूर रहे।
साथ ही रायगढ़ वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) के निर्देश पर उप वन मंडल अधिकारी आशुतोष मंडावा और वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांत सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लेने के बाद घायल हाथी के इलाज के लिए चार पशु चिकित्सकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम को तत्काल वहां बुलाया गया। रात के समय ही ग्रामीणों और वन अमले की संयुक्त निगरानी में राहत एवं उपचार कार्य शुरू कर दिया गया।
इलाज के दौरान तोड़ा दम
वन विभाग की टीम और डॉक्टरों ने हाथी को बचाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। वन अधिकारियों का कहना था कि हाथी के कमर और शरीर के पिछले हिस्से में गंभीर चोटें आई थीं। चोट इतनी गंभीर थी कि उसका पिछला हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हो गया था। इसी वजह से हाथी खड़ा भी नहीं हो पा रहा था, जिससे उसकी मौत हो गई। ऐसे में मंगलवार को वन विभाग की टीम ने मंगलवार शाम तक मृत हाथी के शव के पोस्टमार्टम कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है।
पूरी रात मंडराता रहा दल
उक्त घटना के बाद वहां पूरी रात पांच हाथियों का दल आसपास क्षेत्र में मंडरा रहा था। जिसे देखते हुए वनकर्मी उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए घटना स्थल से दूर भगाने का प्रयास करते रहे, ताकि घायल हाथी का उपचार सही ढंग से हो सके। ग्रामीणों की मानें तो रेलवे लाइन जंगल के बीच होकर गुजरने के कारण हमेशा हाथियों का दल इधर से उधर जाते रहते हैं। ऐसे में अगर मालगाडिय़ों की संख्या बढ़ती है तो अब इस तरह के हादसे आम हो जाएंगे। वहीं अब हाथियों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग को हाथियों के मुवमेंट पर लगातार नजर रखना होगा, इसके साथ ही ट्रेनों के परिचालन में भी सावधानी बरतनी होगी। तभी इस तरह के हादसों में कमी आ पाएगी।



