रायगढ़। आबकारी एक्ट के मामले में कैदी संजय बघेल की जेल में संदिग्ध मौत हो गई। अब पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर दावा किया कि आरोपी के साथ थाने में किसी तरह की मारपीट नहीं की गई। वहीं, परिजनों की तरफ से पैसे लेने के लगाए आरोपों की जांच अलग से कराई जा रही है।
दरअसल, कोतरारोड़ थाना क्षेत्र के ग्राम नवापारा निवासी संजय बघेल (32) की जेल में मौत के बाद परिजनों ने पुलिस पर मारपीट और अवैध रूप से रुपए लेने के आरोप लगाए थे। मामले की न्यायिक जांच जेएमएफसी रायगढ़ की तरफ से की जा रही है। मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसएसपी शशि मोहन सिंह, डीएसपी सुशांतो बनर्जी और वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी पीएस भगत ने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम साझा किया। पुलिस के अनुसार, 10 जून की सुबह मुखबिर से सूचना मिली थी कि अरसीपाली चौक के पास एक व्यक्ति अवैध महुआ शराब लेकर खड़ा है। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और संजय बघेल के कब्जे से 30 लीटर कच्ची महुआ शराब बरामद किया। आरोपी को दोपहर 12.43 बजे थाना लाया गया और आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
परिजन को दी गई थी गिरफ्तारी की सूचना
पुलिस ने बताया कि, आरोपी को बंदीगृह के बाहर बैठाया गया और उसके परिजनों को सूचना दी गई। इसके बाद उसका भाई अजय बघेल और परिजन थाने पहुंचे। दोपहर करीब 2.15 बजे विधिवत गिरफ्तारी दर्ज कर इसकी सूचना भी परिजनों को दी गई। पुलिस की तरफ से जारी सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, दोपहर 2.21 बजे संजय बघेल आराम करता दिखाई देता है। फुटेज में पुलिसकर्मी उसे पानी उपलब्ध कराते और भोजन कराते हुए भी नजर आ रहे हैं। वहीं परिजनों के साथ बातचीत करते हुए भी वह कैमरे में दिखाई देता है।
मेडिकल जांच में फिट पाया गया
पुलिस के मुताबिक, शाम को संजय बघेल को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया गया। चिकित्सीय परीक्षण के दौरान उसने किसी प्रकार की चोट या शारीरिक परेशानी की शिकायत नहीं की। मेडिकल रिपोर्ट में उसे फिट बताया गया। इसके बाद उसे दूसरे आरोपी के साथ न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया। इस दौरान उसका एक परिजन भी मौजूद था। पुलिस ने कहा कि शराब प्रकरण में रुपए लेने की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। मामले के जांचकर्ता प्रधान आरक्षक श्यामदेव साहू और आरक्षक शंभू चौहान को लाइन अटैच कर दिया गया है। शिकायत की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी की तरफ से की जा रही है।
पीएम रिपोर्ट में चोट नहीं बनी मौत की वजह
पुलिस के अनुसार पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर मिले चोट के निशानों को मौत का कारण नहीं बताया गया है। मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच की अनुशंसा की गई है। पुलिस का कहना है कि न्यायिक जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।



