खरसिया। कैलाश शर्मा। सनातन धर्म में विशेष और अत्यंत फलदायी माने जाने वाले पावन पुरुषोत्तम मास के शुभ अवसर पर धर्मनगरी खरसिया की पवित्र पावन भूमि का पूरा क्षेत्र अध्यात्म और भक्ति के रंग में सराबोर हो उठा है। यहाँ के सुप्रसिद्ध और आस्था के केंद्र श्री मेहंदीपुर बालाजी श्री गीता मंदिर प्रांगण में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। 27 मई से शुरू हुआ यह दिव्य आध्यात्मिक उत्सव आगामी 2 जून तक निरंतर चलेगा, जिसने क्षेत्र के जनमानस को भक्ति में सराबोर कर दिया है। ?कथा के प्रथम दिन से ही बहुत ही कम उम्र के प्रख्यात और ओजस्वी कथा व्यास पंडित संकल्प कृष्ण शास्त्री जी की सुमधुर वाणी से श्रीमद्भागवत कथा की अमृतधारा बह रही है। शास्त्री जी के मुखारविंद से फूट रहे दिव्य भजनों, सूक्ष्म तर्कों और मर्मस्पर्शी प्रसंगों को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर अश्रुपूर्ण नेत्रों से भगवान की भक्ति में लीन नजर आ रहे हैं।
पुरुषोत्तम मास में भागवत श्रवण का अनंत महत्व
कथा व्यास पंडित संकल्प कृष्ण शास्त्री जी ने व्यासपीठ से कथा की महिमा का बखान करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत साक्षात श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। सामान्य दिनों की तुलना में पुरुषोत्तम मास में की गई भक्ति, दान और कथा श्रवण का फल अनंत गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा:
यह मनुष्य जीवन बड़े ही भाग्योदय से मिलता है और उसमें भी भगवान की कथा सुनने का अवसर केवल ईश्वर की असीम कृपा से ही संभव है। जो जीव इस पावन मास में भगवान हरि की लीलाओं का रसपान कर लेता है, उसके जन्म-जन्मांतर के पाप-ताप मिट जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
संगीतमय प्रस्तुतियों पर झूम उठे श्रद्धालु, भक्तिमय हुआ वातावरण
इस ज्ञानयज्ञ की सबसे बड़ी विशेषता इसका संगीतमय स्वरूप है। पंडित जी के साथ आए कुशल संगीतकारों की टोली द्वारा पारंपरिक भजनों और सोहरों की प्रस्तुति दी जाती है, महिलाएँ, बुजुर्ग और युवा सभी भगवान की भक्ति में लीन होकर झूमते और नृत्य करते नजर आ रहे हैं।
कथा के पहले दिन भव्य कलश यात्रा निकाली गई थी, जिसके बाद से ही मंदिर प्रांगण की आभा देखते ही बन रही है। आकर्षक विद्युत सज्जा और फूलों से महकते पंडाल ने वातावरण को पूरी तरह अलौकिक बना दिया है।?श्री गीता मंदिर समिति, श्री मेहंदीपुर बालाजी परिवार तथा स्थानीय आयोजकों ने संयुक्त रूप से क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमी भाई-बहनों, माताओं और बुजुर्गों से सादर अनुरोध किया है कि वे प्रतिदिन समय पर कथा स्थल पहुँचकर व्यासपीठ को नमन करें। आयोजकों का कहना है कि खरसिया की धरा का यह सौभाग्य है कि यहाँ इतनी दिव्य कथा का आयोजन हो रहा है, अत: अधिक से अधिक संख्या में पधारकर इस अमृतधारा का रसपान करें, भगवान का आशीर्वाद लें और अपने जीवन को कृतार्थ करें।



