रायपुर। नगर निगम और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामला नेताजी सुभाष चंद्र बोस वार्ड-31 का है, जहां नई पानी टंकी के लिए 22 करोड़ रुपए का टेंडर जारी कर दिया गया, लेकिन जिस जमीन पर टंकी बननी है, उस पर ही अब विवाद हो गया है। जानकारी के मुताबिक, नगर निगम ने बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए ही टेंडर जारी कर दिया। महिला एवं बाल विकास विभाग का दावा है कि जिस जमीन पर टंकी प्रस्तावित है, वह उनकी है। ऐसे में अब निर्माण कार्य पर अनिश्चितता के हालात बन गए हैं।
जोन क्रमांक-3 के इस वार्ड में पिछले कई दिनों से भीषण जल संकट बना हुआ है। हालात यह हैं कि 30 से 35 से ज्यादा पाइंट ड्राय हो चुके हैं और टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई की जा रही है। करीब 15 हजार वर्गफीट जमीन पर टंकी बननी थी, लेकिन जमीन स्पष्ट नहीं होने से काम लटक गया है। भूमि पूजन से पहले ही विवाद नगर निगम की ओर से भूमि पूजन की तैयारी भी शुरू कर दी गई थी। एक दिन पहले तक साफ-सफाई कराई गई, लेकिन इसी दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जमीन पर अपना दावा जता दिया। इससे पूरा मामला उलझ गया।
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, क्या टेंडर जारी करने से पहले जांच नहीं करनी थी? संबंधित विभाग से एनओसी लेना जरूरी नहीं था। तिवारी ने आरोप लगाया कि नगर निगम पहले टेंडर जारी कर देता है और बाद में जमीन तलाशता है। उन्होंने कहा, जब तक अधिकारी अपनी प्रक्रिया पूरी करेंगे, तब तक जनता पानी के लिए परेशान होती रहेगी। यह राजधानी की व्यवस्था के साथ मजाक है।
वहीं महापौर मीनल चौबे ने कहा कि मामले को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग से बातचीत जारी है और जल्द ही एनओसी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि टंकी का निर्माण आम जनता की पानी समस्या को देखते हुए किया जा रहा है और इसे जल्द शुरू कराया जाएगा। फिलहाल, जमीन विवाद के चलते टंकी निर्माण में देरी तय मानी जा रही है, जिससे वार्डवासियों को पानी संकट से राहत मिलने में और इंतजार करना पड़ सकता है।
22 करोड़ की पानी टंकी पर जमीन विवाद
नगर निगम और महिला-बाल विकास विभाग आमने-सामने



