रायगढ़। एक जमाने में जल संसाधन विभाग को सबसे मलाईदार विभाग माना जाता था, धीरे-धीरे आबकारी, खनिज और उर्जा विभाग ने मलाईदार विभागों का तमगा हासिल कर लिया। लेकिन सिंचाई विभाग के अफसरों की खिंचाई में कोई कमी नहीं आई। रायगढ़ जिले में तो सिंचाई विभाग पूर्णत: खिंचाई विभाग में तब्दील हो चुका है। जिसे ना तो अपने बांधों की फिक्र है, ना ही नहरों की फिक्र है और ना ही विभाग द्वारा पूर्व में अधिगृहीत की गई जमीनों की सुरक्षा की चिंता है। उक्ताशय का आरोप वरिष्ठ इंका नेता मुरारी गुप्ता ने लगाते हुए केन्द्र सरकार से रायगढ़ सिंचाई विभाग के क्रिया कलापों की सी.बी.आई. जाँच की मांग की है।
श्री गुप्ता ने बाताया कि ताजा तरीन उदाहरण बिलासपुर डेम के क्षतिग्रस्त होने का है। जहाँ अन्नदाताओं द्वारा कई दिनों से सिंचाई हेतु पानी छोडऩे की मांग की जा रही थी। किंतु आलाअधिकारी मौन साधे रहे नतीजा यह हुआ कि डेम का गेट क्षतिग्रस्त हो गया और करोड़ो लीटर पानी सडक़ों पर बह गया। यदि समय पर किसानों की मांग मान ली जाती तो कई हेक्टर में सिंचाई हो जाती, डेम का पानी भी व्यर्थ नहीं जाता और पानी कम होने से हो सकता है डेम का गेट भी क्षतिग्रस्त नहीं होता।
श्री गुप्ता ने दुसरा उदाहरण देते हुए बताया कि टीपाखोल बांध की नहर गायब हो गई। उसके ऊपर बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी हो गई है। नहरें राष्ट्र की संपत्ति होती है किंतु सिंचाई विभाग के अफसर बेजा कब्जा धारियों को मात्र नोटिस देकर चुप बैठे है। इस मामले में राज्य सरकार की चुप्पी भी अनेक रहस्यों को जन्म दें रही। पूर्व में टीपाखोल की नहर का पानी शहर के रामभांठा मोहल्ले तक आता था जहाँ लोग इस पानी को निस्तार हेतु उपयोग करते थे। अब यह नहर कई वर्षों से गायब है। मजे की बात ता ेयह है कि नहर के गायब होने के तीन-चार साल बाद इसेी मरम्मत में लगभग 28 लाख रूपया फूंक दिया था।
तीसरा उदाहरण देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि कोकड़ी तराई जलाशय की अधिकांश जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है। विभाग नोटिस-नोटिस का खेल खेलते हुए गेंद कभी राज्स्व विभाग की ओर फेंकता है तो राज्स्व की कछुआ चाल किसी से छिपी नहीं।
कंग्रेस नेता का आरोप है कि सिंचाई विभाग अपने विभाग की बकाया राशि वसूल करने में कोई दिलचस्पी नहीं लेता क्योंकि इसमें किसी भी प्रकार का चढ़ावा नहीं मिलता उल्टे वसुली नहीं करने पर चढ़ावा मिलने के पुरे चांस रहते है। आज की तिथि मं विभाग का करोंड़ों रूपया विभिन्न उद्योगों पर जलकर के रूप् में बकाया है। गरीब का बिजली बिल दो हजार भी बाकी हो तो उसके घर में अंधेरा कर दिया जाता है लेकिन उद्योगों पर करोड़ों का बकाया होने के बावजुद पानी का भरपुर दोहन उद्योंगों द्वारा जारी है। श्री गुप्ता ने मुख्यमंत्री और प्रदेश के वित्तमंत्री से आग्रह किया है कि रायगढ़ जिले के सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच करांए और विभाग की बेशकीमती जमीन और करोंड़ों की बकाया राशि वसुलने हेतु कड़ी कार्यवाही करें।
जिले के सिंचाई विभाग खिंचाई विभाग में तब्दील-मुरारी गुप्ता, नहरें गायब- जलाशयों पर बेजा कब्जा- विभाग मौन
उद्योगों पर जलकर का करोंड़ों बकाया होने के बावजुद पानी का दोहन जारी



