रायपुर। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 31 लाख 50 हजार रुपए की ठगी हो गई। आरोप है कि तीन लोगों ने मंत्रालय में नौकरी दिलाने का झांसा देकर कई लोगों से अलग-अलग किस्तों में रकम वसूली, लेकिन लंबे समय बाद भी किसी की नौकरी नहीं लगी। परेशान पीडि़तों ने अब पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। यह मामला टिकरापारा थाना क्षेत्र का है।
शिकायतकर्ता हरीश ध्रुव ने पुलिस को बताया कि आरोपी विश्वनाथ गुप्ता, चंद्रमा गुप्ता और दिपेश नवरंग ने उसे और उसके परिजनों को मंत्रालय में विभिन्न पदों पर नौकरी लगाने का भरोसा दिलाया था। आरोपियों ने हरीश को ड्राइवर, उसकी पत्नी तारा ध्रुव को ऑफिस असिस्टेंट, रिश्तेदारों को डाटा एंट्री ऑपरेटर, ऑफिस असिस्टेंट और चपरासी जैसे पदों पर नियुक्ति का आश्वासन दिया था। पीडि़तों के अनुसार, 19 जुलाई 2024 को कमल विहार के एक रेस्टोरेंट के पास कार में बैठकर आरोपियों ने पहली किस्त के रूप में 5.50 लाख रुपए लिए। इस दौरान उन्होंने पैसे लेते समय वीडियो भी बनाया। इसके बाद अलग-अलग समय पर करीब 6 लाख रुपए और नकद ले लिए गए। हरीश के परिचित स्वप्निल दुबे से भी बेवरेज कॉर्पोरेशन में उपाध्यक्ष बनाने के नाम पर 20 लाख रुपए वसूले गए। पीडि़तों का कहना है कि दिपेश नवरंग उन्हें मंत्रालय भी ले गया, जहां कथित वेरिफिकेशन कराया गया और नियुक्ति पत्र तक दिए गए। इसके बावजूद किसी की जॉइनिंग नहीं हुई। लगातार टालमटोल से परेशान होकर पीडि़तों ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। टिकरापारा थाना पुलिस ने आवेदन लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया जाएगा।
सरकारी नौकरी लगाने के नाम पर 31.50 लाख की ठगी
ड्राइवर-चपरासी बनाने का झांसा देकर पैसे लिए, दो साल बाद भी नहीं लगी जॉब, पीडि़तों ने किया केस



