पखांजुर। कोयलीबेडा ब्लॉक की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रही है। लगभग डेढ़ लाख की आबादी और 400 से अधिक गांवों वाले इस विशाल क्षेत्र में आपातकालीन सेवाओं के नाम पर सिर्फ एक ही 108 एम्बुलेंस उपलब्ध है। यह स्थिति पिछले कई महीनों से बनी हुई है, जिससे आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ गई है।
कोयलीबेडा ब्लॉक में 7 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 1 सिविल अस्पताल, 1 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और दर्जनों उपस्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं, लेकिन इन सभी के लिए पर्याप्त एम्बुलेंस सुविधा नहीं है। बताया जा रहा है कि लगभग एक वर्ष से एम्बुलेंस सेवा लगभग ठप पड़ी हुई है। स्थिति यह है कि सडक़ दुर्घटना या किसी गंभीर मरीज के लिए जब 108 पर कॉल किया जाता है, तो या तो फोन रिसीव नहीं होता या फिर यह कहकर मना कर दिया जाता है कि एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मजबूरन मरीजों को निजी वाहन या किराये की गाडिय़ों से अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे न सिर्फ समय बर्बाद होता है बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है। क्षेत्र में आए दिन सडक़ दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन समय पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण कई बार मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि नि:शुल्क आपातकालीन सेवा 108 सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गई है। इस विषय में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) संजीव वैष्णव ने बताया कि हमारे पास वर्तमान में केवल एक 108 एम्बुलेंस है, जबकि क्षेत्र बहुत बड़ा है। और एम्बुलेंस की सख्त आवश्यकता है। इस संबंध में मैं लगातार उच्च अधिकारियों को अवगत करा रहा हूं। अधिकारी भी मानते हैं कि एम्बुलेंस की गंभीर समस्या बनी हुई है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। क्षेत्रवासियों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि बार-बार मांग और शिकायत के बाद भी शासन-प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही अतिरिक्त एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं की गई, तो किसी बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक ठोस कदम उठाता है।
एक ही 108 एम्बुलेंस के भरोसे डेढ़ लाख की आबादी, पखांजुर में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल



