रायगढ़। जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड में भ्रष्टाचार किस कदर जड़ें जमा चुका है, इसका ताजा उदाहरण आदिम जाति विभाग द्वारा निर्माणाधीन करोड़ों के हॉस्टल भवन से साफ झलकता है। यहां ठेकेदार की मनमानी, विभागीय उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही मिलकर एक ऐसा घोर अनियमित वातावरण बना चुकी है, जहाँ नियम-कानून मानो सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गए हों।निर्माण स्थल की वास्तविकता बेहद चैंकाने वाली है। न गुणवत्ता की जांच, न इंजीनियरों की मौजूदगी और न ही किसी अधिकारी की परवाह ठेकेदार अपनी मर्जी से जैसे चाहे निर्माण कार्य करा रहा है। हालत यह कि ढलाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य के दौरान भी विभाग का एक भी जिम्मेदार अधिकारी स्थल पर मौजूद नहीं था। जिससे परिणाम निर्माण कार्य में खुलेआम अनियमितताएँ और घटिया मटेरियल का बेहिसाब उपयोग।
बता दें, सबसे शर्मनाक दृश्य तब देखने को मिला जब निर्माण स्थल पर छोटे-छोटे बच्चों को भारी-भरकम ढलाई का काम करते पाया गया। यह न सिर्फ बाल श्रम कानून का घोर उल्लंघन है, बल्कि मानवता के नाम पर एक कलंक भी है। ऐसा लगता है जैसे करोड़ों का निर्माण, निरीक्षण के नाम पर पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। सवाल यह भी उठता है कि क्या अधिकारियों की आंखों पर भ्रष्टाचार की पट्टी इतनी कसकर बंधी है कि उन्हें यह खुला अपराध भी दिखाई नहीं देता?
और वहीं सामग्री की अनियमितता इतनी स्पष्ट है कि आम नागरिक भी देखकर समझ जाए कि यहां ‘खुलकर खेल’ खेला जा रहा है। बता दें,ग्राउंड फ्लोर के कॉलम में 16 एमएम की छड़ और ऊपर की मंजिलों में 12 एमएम की छडक़ृक्या यही है करोड़ों की लागत वाले भवन का सरकारी एस्टीमेट? विशेषज्ञों का मानना है कि कॉलम-बीम भवन की जान होते हैं, और इनमें ऐसे अंतर का कोई तकनीकी औचित्य नहीं। यह सीधे-सीधे भ्रष्टाचार का मामला है, जिसकी तत्काल जांच आवश्यक है।
बहरहाल धरमजयगढ़ में निर्माणाधीन इस भवन से एक बार फिर यह साफ हो गया है, कि बिना ठोस प्रशासनिक कार्रवाई और निगरानी के करोड़ों की परियोजनाएं कैसे भ्रष्टाचार का अड्डा बन जाती हैं। स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा है कि इस गंभीर मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और संबंधित दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी राशि और जनहित दोनों सुरक्षित रह सकें।
धरमजयगढ़ में भ्रष्टाचार की बेजोड़ मिसाल, ठेकेदार की मनमानी
बाल श्रमिकों से करवाया जा रहा करोड़ों का निर्माण!



