रायगढ़। ग्राम पंचायत शाहपुर में आयोजित ग्रामसभा ने शनिवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 1677.253 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित एसईसीएल ओपन कोल ब्लॉक परियोजना को सर्वसम्मति से स्थायी रूप से खारिज कर दिया। ग्रामसभा ने पाँचवीं अनुसूची और छत्तीसगढ़ पेसा अधिनियम 2022 का हवाला देते हुए स्पष्ट कहा कि ग्राम की सहमति के बिना कोई खनन, उद्योग, भूमि अधिग्रहण, सर्वे या जनसुनवाई कानूनी रूप से अवैध होगी। वहीं ग्रामसभा ने बताया कि प्रस्तावित क्षेत्र में 622.253 हेक्टेयर घना जंगल, हाथियों का पारंपरिक गलियारा, मांड नदी, आदिवासी पुरखा देव-स्थल तथा प्रसिद्ध मां अंबेटिकरा मंदिर स्थित हैं। खनन से इन सभी प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों पर भारी संकट मंडराएगा। और ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना लागू होने पर मानव-हाथी संघर्ष बढ़ेगा, जलस्रोत प्रदूषित होंगे और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।इसके साथ ही ग्रामसभा ने बताया कि खनन क्षेत्र किसानों की जीविका पर भी सीधा प्रहार करेगा। और वहीं शाहपुर क्षेत्र के हजारों किसान तरबूज, मक्का और धान की खेती से हर वर्ष लाखों की आय अर्जित करते हैं। खनन शुरू होते ही खेती ठप हो जाएगी और ग्रामीणों की आजीविका समाप्त हो सकती है। आगे ग्रामसभा ने आरोप लगाया कि कई किसानों की भूमि पर बिना सहमति के भू-अर्जन दर्ज किया गया है। इस पर तत्काल रोक लगाते हुए एसडीएम को गलत प्रविष्टियाँ हटाने का निर्देश देने की मांग रखी गई।
और वहीं साथ ही ग्रामसभा ने स्पष्ट कहा कि परियोजना को लेकर किसी भी प्रकार की पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित करना भी पूर्णत: अस्वीकार्य होगा। वहीं अंत में ग्रामसभा ने एक स्वर में घोषणा की ‘शाहपुर क्षेत्र में कोयला खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। हमारी जल-जंगल-जमीन, संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा सर्वोपरि हैकृइसके खिलाफ कोई भी परियोजना स्वीकार नहीं।’ शाहपुर ग्रामसभा का यह निर्णय ग्रामीण जनाधिकार, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी संस्कृति की रक्षा की दिशा में एक मजबूत और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
शाहपुर की ग्रामसभा में दिखा कड़ा जनविरोध
एसईसीएल कोल ब्लॉक को पूर्णत: ठुकराया



