रायगढ़। जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने आरोपी दीपक बुदुला को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं, मामले में नामजद एक अन्य आरोपी शिवा पटनायक को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। मामला उस समय सामने आया, जब नाबालिग पीडि़ता ने एक नवजात बच्चे को जन्म दिया और इसकी जानकारी जिला बाल संरक्षण इकाई तक पहुंची।
अभियोजन के मुताबिक, जिला बाल संरक्षण इकाई रायगढ़ में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की काउंसलर राजकुमारी पटेल को 20 जनवरी 2025 की दोपहर करीब 3 बजे सूचना मिली थी कि रायगढ़ के कान्हा अस्पताल में एक नाबालिग बालिका ने नवजात बच्चे को जन्म दिया है। सूचना मिलने के बाद जिला बाल संरक्षण इकाई के दो कर्मचारी अस्पताल पहुंचे। वहां नाबालिग के साथ एक युवक भी मौजूद मिला। टीम ने दोनों को 22 जनवरी 2025 को आवश्यक दस्तावेजों के साथ बाल कल्याण समिति रायगढ़ के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा।
अभियोजन के अनुसार, नाबालिग को 31 जनवरी 2025 को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। पहली काउंसलिंग के दौरान उसने घटना के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद 21 मार्च 2025 को दोबारा काउंसलिंग की गई। दूसरी काउंसलिंग के दौरान पीडि़ता ने घटना के संबंध में जानकारी दी और बताया कि वर्ष 2023 में एक युवक ने उसे बहला-फुसलाकर शारीरिक संबंध बनाए थे।
इसके बाद मई 2023 में उसकी मुलाकात दीपक बुदुला से होने की बात सामने आई। अभियोजन के अनुसार, दीपक बुदुला पीडि़ता को बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और वहां उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद पीडि़ता जुलाई 2024 में गर्भवती हो गई। सितंबर 2024 में उसे अपनी गर्भावस्था की जानकारी होने की बात अभियोजन के मामले में सामने आई। अभियोजन के अनुसार, इसी दौरान पीडि़ता स्थानीय मंदिर के पास नारियल बेचने का काम कर रही थी। वहां उसकी मुलाकात शिवा पटनायक से हुई। आरोप के मुताबिक, शिवा ने प्रेम संबंध की बात कहकर उसके साथ भी शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और पीडि़ता के बयानों के आधार पर अदालत ने शिवा पटनायक को दोषमुक्त कर दिया। पीडि़ता ने 19 जनवरी 2025 को एक बच्चे को जन्म दिया। इलाज के लिए उसे कान्हा अस्पताल ले जाया गया था। नवजात के जन्म की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से जिला बाल संरक्षण इकाई तक पहुंची और इसके बाद पूरे मामले की जानकारी सामने आई। काउंसलिंग के बाद बाल कल्याण समिति को रिपोर्ट सौंपी गई। बाल कल्याण समिति की ओर से नाबालिग के साथ कथित तौर पर गलत करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत दी गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी दीपक बुदुला को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
अभियोजन के अनुसार, जांच के दौरान पीडि़ता के साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाए जाने से संबंधित साक्ष्य सामने आए। मामले में नामजद शिवा पटनायक और एक अन्य नाबालिग आरोपी का पता नहीं चल सका। पुलिस ने दोनों के संबंध में फरारी पंचनामा तैयार किया। प्रकरण की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं स्नञ्जस्ष्ट कोर्ट रायगढ़ के न्यायाधीश देवेंद्र यादव की अदालत में हुई। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों तथा पीडि़ता के बयानों पर विचार करने के बाद दीपक बुदुला को दोषसिद्ध पाया। वहीं शिवा पटनायक के संबंध में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और पीडि़ता के बयानों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं पाया। इसके बाद उसे दोषमुक्त कर दिया गया। अदालत ने दीपक बुदुला को 20 साल के कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
नाबालिग से दुष्कर्म, आरोपी को 20 साल की कैद, नवजात को जन्म देने के बाद खुला मामला



