रायगढ़। पीएमश्री योजना के तहत छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को आधुनिक और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धतियों से जोडऩे के लिए एसईआर पुणे में चार दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण आयोजित किया गया। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के श्रीमती इंद्राणी बालन साइंस एक्टिविटी सेंटर में आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश के 100 शिक्षकों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का फोकस विज्ञान और गणित को प्रयोग, गतिविधि, तकनीक और रोजमर्रा के अनुभवों से जोडक़र बच्चों में जिज्ञासा, तार्किक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में रायगढ़ जिले से सात शिक्षकों ने सहभागिता की। इनमें ज्योति यादव पीएमश्री सेजेस धरमजयगढ़, अमीलाल राठिया पीएमश्री नकना धरमजयगढ़, रामेश्वर सिंह राठिया पीएमश्री नगोई, कल्याणी टंडन पीएमश्री सेजेस खरसिया, सतीश मिंज पीएमश्री कोयलंगा, बुलबुल जायसवाल पीएमश्री शासकीय नटवर इंग्लिश स्कूल रायगढ़ और रूपेश कुमार मेहर पीएमश्री बासनपाली पुसौर शामिल रहे। प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव और तकनीकों को शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में लागू करेंगे, जिससे विद्यार्थियों के लिए विज्ञान और गणित की पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक और रोचक बनाने में मदद मिलेगी।
‘कबाड़ से जुगाड़’ से विज्ञान सीखने पर जोर
कार्यशाला में भारतीय विज्ञान शिक्षक, खिलौना वैज्ञानिक और पद्मश्री सम्मानित अरविंद गुप्ता का विशेष सत्र आयोजित किया गया। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा को बनाए रखते हुए आनंदमय और गतिविधि आधारित शिक्षा देने पर जोर दिया। उन्होंने ‘कबाड़ से जुगाड़’ की अवधारणा के जरिए कागज, स्ट्रॉ, धागे, टेट्रापैक और अन्य अनुपयोगी सामग्री से वैज्ञानिक खिलौने तैयार करके दिखाए। शिक्षकों को बताया गया कि स्थानीय और कम लागत वाली सामग्री का उपयोग करके भी बच्चों में वैज्ञानिक सोच और प्रयोग करने की आदत विकसित की जा सकती है। उन्होंने विद्यालय को ऐसा स्थान बनाने पर जोर दिया, जहां बच्चे सीखने के लिए उत्साह के साथ आएं और शिक्षा उनके लिए आनंददायक अनुभव बने।
विज्ञान-गणित को गतिविधियों से जोडऩे की ट्रेनिंग
चार दिवसीय प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मक सोच, तार्किक चिंतन, नवाचार और आधुनिक शिक्षण तकनीकों की समझ विकसित करना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को कक्षा में कंप्यूटेशनल थिंकिंग के इस्तेमाल से लेकर कहानी के माध्यम से विषय को रोचक बनाने तक की तकनीकें सिखाई गईं। इसके अलावा गतिविधियों के जरिए गणित समझाना, खिलौनों से विज्ञान सीखना, समस्या समाधान, तर्क क्षमता और गतिविधि आधारित मूल्यांकन जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
आईआईएसईआर में प्रयोगात्मक सीखने का अवसर
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने विज्ञान केंद्र, पिंपरी-चिंचवड़ और आईआईएसआईआर पुणे द्वारा स्थापित ‘कल्पगृह’ का भी भ्रमण किया। यहां शिक्षकों ने विभिन्न हैंड्स-ऑन गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को सरल तरीके से समझा। ऑटोमोबाइल उद्योग की कार्यप्रणाली, 3डी फिल्म के जरिए पर्यावरण पर मानवीय गतिविधियों के प्रभाव और तारामंडल के माध्यम से ग्रहों, नक्षत्रों तथा सौरमंडल से संबंधित विषयों को समझने का अवसर मिला।



