रायगढ़। शहर के आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के हजारों परिवारों से निर्धारित दर से अधिक जलकर वसूले जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में पूर्व सभापति जयंत ठेठवार ने नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर तत्काल त्रुटि सुधारने और अतिरिक्त वसूली गई राशि का समायोजन करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि नगर निगम द्वारा गरीब, मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवारों के लगभग 865 मकानों से शासन द्वारा निर्धारित 60 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 200 रुपये प्रतिमाह जलकर लिया जा रहा है। जबकि छत्तीसगढ़ शासन के 12 फरवरी 2011 के राजपत्र के अनुसार ऐसे आवासीय मकान, जो संपत्ति कर के दायरे में नहीं आते और केवल समेकित कर जमा करते हैं, उनसे 60 रुपये प्रतिमाह (720 रुपये वार्षिक) जलकर लिया जाना निर्धारित है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 13 मार्च 2018 को नगर निगम परिषद की बैठक में ईडब्ल्यूएस आवासों को संपत्ति कर से मुक्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बावजूद कई वार्डों में स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों से अधिक जलकर वसूला जा रहा है। ज्ञापन के अनुसार वार्ड क्रमांक 8, 9, 25, 27, 35, 1 और 24 सहित लगभग 24 वार्डों के 777 ईडब्ल्यूएस मकानों से अधिक जलकर लिया जा रहा है। इसके अलावा नगर निगम के ऑनलाइन डेटा के अनुसार शहर के 11,005 मकानों में से 3,005 मकान ऐसे हैं, जिनका जलकर 60 रुपये होना चाहिए, लेकिन उन्हें किसी श्रेणी में दर्ज ही नहीं किया गया है, भविष्य में उनसे भी ज्यादा टैक्स लिया जाने कि सम्भावना है। यह संख्या कुल दर्ज मकानों का लगभग 42 प्रतिशत बताई गई है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि इससे गरीब और मजदूर वर्ग के परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। नगर निगम से मांग की गई है कि 10 दिनों के भीतर सभी प्रभावित परिवारों के जलकर की दरों में सुधार किया जाए तथा भविष्य में वसूली जाने वाली अतिरिक्त राशि का समायोजन किया जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो प्रभावित परिवारों के साथ आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी। ज्ञापन के अंत में नगर निगम से शासन के नियमों के अनुरूप जलकर निर्धारण करते हुए गरीब एवं ईडब्ल्यूएस परिवारों को राहत देने की मांग की गई है।
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गरीबों से तीन गुना टैक्स वसूल रहा निगम



