रायगढ़। हमारे भारतीय संस्कृति में वृक्षों को पूजनीय माना गया है। आदि काल से ही हमारे ऋषि-मुनि पौधारोपण और संरक्षण को जीवन का हिस्सा मानते आए हैं। पीपल, बरगद, तुलसी, नीम जैसे वृक्षों को देवता तुल्य मानकर सहेज कर उनकी सुरक्षा करना हमारी परंपरा रही है। यह कहना है शहर की थवाईत महिला समिति अध्यक्ष श्रीमती दिशा थवाईत का।
उनका कहना है कि आज समय के साथ यह परंपरा कमजोर पड़ती जा रही है। हम वृक्षारोपण तो कर लेते हैं, फोटो खिंचवाकर भूल भी जाते हैं। पौधा लगाना जितना जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी है उसका संरक्षण। बिना देखभाल के लगाया गया पौधा कुछ ही दिनों में सूख जाता है, और हमारी मेहनत व्यर्थ हो जाती है। वृक्ष हमें फल, फूल, औषधि और शुद्ध हवा देते हैं साथ ही जीवन को निरोगमय रखते हैं। उनकी जड़ें मिट्टी को बांधकर रखती हैं, जिससे भूक्षरण रुकता है और धरती उपजाऊ बनी रहती है। बढ़ते प्रदूषण, गर्मी और जल संकट के बीच पेड़ ही हमारे जीवन रक्षक हैं। इसलिए जरूरी है कि हम अपने घर, गली, स्कूल और खाली जमीनों में पौधे लगाएं और उन्हें खाद-पानी देकर बड़ा करें। हर व्यक्ति एक पौधा लगाएँ और सालभर देखभाल करें। यदि हम पौधारोपण के साथ संरक्षण को जोड़ेंगे तभी पर्यावरण बचेगा, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा। यही हमारे जीवन का सबसे बड़ा और मूल उद्देश्य भी होना चाहिए।
जीवन और भविष्य के लिए जरूरी है पौधारोपण एवं संरक्षण



