धरमजयगढ़। जिले के धरमजयगढ़ राजस्व अनुविभाग क्षेत्र अंतर्गत राजस्व अभिलेखों में गंभीर गड़बडिय़ों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हालांकि, हाल ही में कापू क्षेत्र अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजाति की भूमि से जुड़े गंभीर मामले में प्रशासन द्वारा बड़ी कार्रवाई हुई है।
इस कड़ी में ताज़ा मामला ग्राम उदउदा का है, जहाँ मिशल रिकॉर्ड, अधिकार अभिलेख और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर विरोधाभास होने का मामला सामने आया है।
राजस्व रिकॉर्ड में उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार, सन 1931-32 के मिशल रिकॉर्ड में खसरा नंबर 388/1, कुल 61.45 एकड़ भूमि ‘घास मद’ में दर्ज है। वहीं 1954-55 के अधिकार अभिलेख में खसरा नंबर 388/1छ, कुल रकबा 2.830 हेक्टेयर भूमि दमोदर पिता चैतन, जाति गोंड (अनुसूचित जनजाति) निवासी धरमजयगढ़ के नाम पर दर्ज है।
आरोप है कि बाद में राजस्व अभिलेखों में जाति संबंधी प्रविष्टियों में कथित तौर पर छेड़छाड़ करते हुए इसी खसरा नंबर 388/1/छ को दिनांक 30 अक्टूबर 2022 को फौती नामांतरण आदेश के माध्यम से भुनेश्वर प्रसाद यादव एवं अन्य निवासी जमरगी डी के नाम दर्ज कर दिए गए। इसके बाद वर्ष 2023-24 के बी-1 राजस्व रिकॉर्ड में इसी खसरा नंबर की 0.8090 हेक्टेयर भूमि द्रोपदी पति ब्रम्हानंद, अनुसूचित जनजाति (उरांव), निवासी लुडेग के नाम दर्ज हो गया है। ऐसे में यह पूरा मामला संदेह के दायरे में आ गया है।
सबसे बड़ा जांच का विषय यह है कि पांचवीं अनुसूची अंतर्गत आने वाले अनुसूचित क्षेत्र में मूल अभिलेखों में यह भूमि अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति के नाम दर्ज है, तो किस आधार पर नामांतरण किया गया? क्या नामांतरण से पहले सभी राजस्व अभिलेखों एवं वैधानिक प्रावधानों का परीक्षण किया गया? यदि रिकॉर्ड में परिवर्तन हुआ, तो उसके पीछे क्या विधिक प्रक्रिया अपनाई गई? बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में हल्का नंबर 34 के पटवारी प्रमोद राठिया एवं तत्कालीन तहसीलदार भोज कुमार डहरिया की भूमिका सवालों के दायरे में है। राजस्व मामलों के जानकारों का कहना है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच हो तो और भी कई सनसनीखेज खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में दस्तावेज़ों में अनियमितता या रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है, तो यह राजस्व विभाग से जुड़े गंभीर मामलों में से एक हो सकता है।
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