सारंगढ़। जपं बिलाईगढ़ के अंतर्गत आने वाले ग्रापं बगमल्ला में विकास कार्यों के लिए शासन द्वारा जारी 15 वें वित्त आयोग की राशि में भारी गबन व भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला उजागर हो रहा है। प्राप्त दस्तावेजों और बिलों के अनुसार, जय ट्रेडर्स के नाम पर लगातार 4 बिल काटकर कुल 12 लाख रुपये का आहरण किया गया है। यह पूरा मामला ग्रापं बगमल्ला के आमाकछार से बरकछार पहुँच मार्ग पर मुरुम एवं मिट्टी धुलाई कार्य से जुड़ा हुआ है। एक ही दिन में कटे 12 लाख के 4 बिल, उठे गंभीर सवाल? सामने आए बिलों (क्र. 742, 743, 744, और 745) में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक प्रत्येक बिल 3 लाख तीन लाख रुपये का है। चारों बिल एक ही 14 जून 26 में जारी किए गए हैं। कार्य 600- 600 ट्रिप (कुल 2400 ट्रिप) मुरुम एवं मिट्टी धुलाई का दावा किया गया है, जिसकी दर ? 500 प्रति ट्रिप दर्शाई गई है।खनन व राजस्व नियमों की उड़ी धज्जियां इस बड़े भुगतान के बाद अब स्थानीय स्तर और शासन – प्रशासन के सामने कई यक्ष प्रश्न खड़े हो गए हैं।
क्या वैध रायल्टी और लीज थी ?
2400 ट्रिप मुरुम, मिट्टी निकालने व परिवहन करने के लिए क्या राजस्व खनिज विभाग से कोई वैध खनन लीज या स्वीकृत रायल्टी पर्ची ली गई थी? बिना वैध रायल्टी के इतनी बड़ी मात्रा में खनिज का उत्खनन और परिवहन पूरी तरह गैर-कानूनी है। जय ट्रेडर्स की पात्रता पर सवाल जय ट्रेडर्स के बिल पर स्पष्ट लिखा है कि यह छड़, सीमेंट, ईंट, सेनेटरी एवं इलेक्ट्रिकल सामानों का विक्रेता है। सवाल यह उठता है कि – क्या इस फर्म के पास 2400 ट्रिप मुरुम धुलाई कराने के लिए परिवहन और खनन की वैध अनुमति थी कागजों पर 2400 ट्रिप या धरातल पर काम एक ही मार्ग के लिए एक ही दिन में 12 लाख रुपये के 4 अलग – अलग बिल काटकर राशि निकालना वित्तीय अनियमितता व बंदरबांट की ओर साफ इशारा करता है।
ग्रापं बगमल्ला में 15वें वित्त आयोग के सरकारी खजाने को चूना लगाने का यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीण और जागरूक नागरिकों नेजिला प्रशासन, खनिज विभाग से मांग की है कि जय ट्रेडर्स द्वारा जारी बिलों की रॉयल्टी पर्चियों की जांच हो। आमाकछार से बरकछार पहुँच मार्ग का भौतिक सत्यापन कराया जाए। फर्जीवाड़ा सिद्ध होने पर दोषी सरपंच, सचिव और संबंधित सप्लायर फर्म पर गबन का मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए । सरपंच के बयान से खुले अनियमितता के राज! सरपंच के इस स्वीकारोक्ति बयान के बाद अब कई बड़े संवैधानिक और कानूनी सवाल खड़े हो रहे हैं,क्या किसी वेंडर/ट्रेडर्स को ठेकेदारी का अधिकार है ? ग्रापं में 15 वें वित्त आयोग के तहत होने वाले निर्माण, मरम्मत कार्य पंचायत द्वारा या स्वीकृत व्यवस्था के तहत कराए जाते हैं। किसी निजी फर्म/ट्रेडर्स (जय ट्रेडर्स) का संचालक खुद काम कैसे करवा सकता है और फिर स्वयं के नाम से 12 लाख रुपये का बिल कैसे जारी कर सकता है? यह सीधे तौर पर हितों के टकराव और वित्तीय नियमों के उल्लंघन का मामला बनता है। सरपंच के इस बयान से यह साफ़ होता नजर आ रहा है कि पंचायत में नियमों को दरकिनार कर चहेते फर्म/व्यक्ति को काम सौंपा गया व सरकारी पैसों का आहरण किया गया। अब देखना यह होगा कि सारंगढ़ जिला प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर शिकंजा कसता है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
बिना रॉयल्टी लीज के 24 सौ ट्रिप मुरुम ढूलाई और 12 लाख के आहरण पर उठे गंभीर सवाल?



