रायगढ़। यह कहावत एक बार फिर चरितार्थ हुई है कि यदि विद्यार्थी या खिलाड़ी अपने माता-पिता एवं शिक्षकों के प्रोत्साहन, मार्गदर्शन और अनुशासन को जीवन में आत्मसात कर ले, तो सफलता स्वयं उसके कदम चूमती है। रायगढ़ के प्रख्यात बैडमिंटन प्रशिक्षक अकरम खान के सुपुत्र एवं राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी आमान खान ने अपनी मेहनत, लगन और समय प्रबंधन के बल पर खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
बचपन से ही अपने पिता को खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देते हुए देखकर आमान के मन में बैडमिंटन के प्रति गहरी रुचि विकसित हुई। उन्होंने कम समय में कई राज्य एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया तथा अनेक अवसरों पर जिला प्रशासन द्वारा 15 अगस्त और 26 जनवरी के समारोह में उत्कृष्ट खिलाड़ी के रूप में सम्मानित भी किए गए। वर्तमान में आमान राष्ट्रीय बैडमिंटन रैंकिंग में 42वें स्थान पर काबिज हैं और लगातार अपने प्रदर्शन से रायगढ़ का गौरव बढ़ा रहे हैं।

खेल के साथ-साथ शिक्षा में भी आमान ने शानदार सफलता अर्जित की। दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल के छात्र रहे आमान ने सीबीएसई कक्षा 12वीं की परीक्षा में 98.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने सुनियोजित तैयारी के साथ ष्टश्वञ्ज-त्र परीक्षा में हिस्ट्री, ज्योग्राफी, पॉलिटिकल साइंस एवं इंग्लिश विषयों में 99 पर्सेंटाइल तथा 903.46 अंक प्राप्त किए। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज में इतिहास विषय से स्नातक अध्ययन हेतु प्रथम चरण में ही प्रवेश मिला।
आमान खान का लक्ष्य इतिहास विषय में उच्च अध्ययन कर आगे चलकर प्रशासनिक सेवा में योगदान देना है। साथ ही वे पुरातत्व (आर्कियोलॉजी) के क्षेत्र में भी कार्य करने की इच्छा रखते हैं। उनका मानना है कि समय की पाबंदी, एकाग्रता और अनुशासन ही सफलता की सबसे मजबूत नींव हैं।
आमान ने कहा कि खेल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है और वे कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ बैडमिंटन को भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी रखेंगे। उनकी उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और परिवार व शिक्षकों का मार्गदर्शन मिले, तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं होती। आज आमान खान रायगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का सशक्त उदाहरण बन चुके हैं।



