रायगढ़। विष्व जनसंख्या स्थिरीकरण दिवस के अवसर पर जिंदल फाउंडेषन द्वारा लोगों को जनसंख्या नियंत्रण के लिए जागरूक करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिंदल पॉवर प्लांट और माइंस के अंतर्गत आने वाले गांवों के ऐसी दंपतियों का सम्मान किया गया। जिन्होंने सरकार द्वारा निर्धारित आयु में विवाह किया, दो बच्चों के बीच तीन साल का गैप रखा और दो बच्चों के बाद पति या पत्नी में से किसी एक ने नसबंदी करा कर जागरूकता का परिचय देते हुए अपने परिवार को नियोजित किया।
जिंदल फाउंडेषन द्वारा आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आयुश्मान आरोग्य मंदिर लिबरा के प्रभारी डॉझ् पवन डनसेना थे। अन्य अतिथियों में जिंदल पॉवर के सीएसआर ग्रुप वाइस प्रेसीडेंट ऋ षिकेश शर्मा, एजीएम सीएसआर राजेष रावत और लिबरा अस्पताल की करुणा सैनी थीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ पवन डनसेना ने कहा कि जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए दो बच्चे होने चाहिए साथ ही दोनों बच्चों के बीच तीन साल का गैप जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों के बीच तीन साल के गैप में ही बच्चे का षारीरिक और मानसिक विकास होता है और मां तथा पिता दोनों बच्चों को पर्याप्त समय देकर सही परवरिष करते हैं।उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं व बच्चों को समय पर सभी टीके लगने चाहिए, साथ ही परिवार नियोजन के साधनों का उपयोग करना चाहिए।उन्होंने संस्थागत प्रसव पर जोर दिया। साथ ही परिवार नियोजनों के साधनों की जानकारी देते हुए बताया कि डिलवरी के 48 घंटे बाद ही कॉपर टी लगवाई जा सकती है, इसे तीन साल तक लगवा सकते हैं। प्रसव के छह माह तक पीरियड नहीं आता इस अवधि के बाद परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों का भी उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि स्थायी तरीका नसबंदी ही है। एजीएम राजेष रावत ने कहा कि बढ़ती हुई जनसंख्या चिंता का विशय हॅै। अच्छे जीवन यापन के लिए अच्छी स्वास्थ्य सुविधा और अच्छी षिक्षा जरूरी है। लगातार जनसंख्या बढऩे से समस्या आती है। परिवार सीमित रहने पर बच्चों को अच्छी षिक्षा व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं।
लडक़े की चाह में अधिक बच्चे पैदा करना परेशानी है
सीएसआर ग्रुप वाइस प्रेसीडेंट ऋ शिकेष षर्मा ने कहा कि पहले स्वास्थ्य सुविधाएं इतनी अच्छी नहीं थी। रिसर्च में यह पता चला है कि पहले शिशु मृत्युदर बहुत अधिक थी, अब वह घटकर प्रति एक हजार में 32 हो गई है, छोटे बच्चे जल्दी मर जाते थे, इसलिए लोग अधिक बच्चा पैदा करते थे। अब स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुई हैं। उन्होंने बताया कि जिंदल फाउंडेषन द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में वात्सल्य योजना चलाई जा रही है। इसके तहत जीवन संगीनी गांवों में जाकर महिलाओं को स्वास्थ्य के लिए जागरूक कर रहीं हैं और गर्भावस्था के दौरान सभी जांच, गोलियां, टीकाकरण करा रहीं है, उनके पोशण पर ध्यान दे रहीं हैं, इससे संस्थागत प्रसव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से तमनार ब्लॉक में मातृ और शिशु मृत्युदर को रोकने में कामयाब हुए हैं। संचालन नीतू सारस्वत ने किया।
राबो के आंगनबाड़ी केंद्र में भी किया गया सम्मान
जनसंख्या स्थिरीकरण दिवस के अवसर पर राबो के आंगनबाड़ी में भी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिंदल के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ भूपेंद्र प्रताप सिंह, उपसरपंच चंपा राठिया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भानूमति राठिया व अन्य उपस्थित थे। डॉ सिंह ने ग्रामीणों को जनसंख्या स्थिरीकरण के बारे में जानकारी दी साथ ही जागरूक होने का आह्वान किया।



