रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े और स्पष्ट निर्देशों तथा राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए खनिज विभाग का मैदानी अमला लगातार सक्रियता के साथ कार्यवाही कर रहा है। शासन स्तर पर की जा रही गहन समीक्षा, सख्त निगरानी और प्रशासनिक चौकसी के परिणामस्वरूप अवैध खनिज गतिविधियों पर लगातार अंकुश लगा है।
खनिज विभाग के सचिव एवं संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनिज उडऩदस्ता तथा जिला स्तरीय टीमों द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण और संयुक्त कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में दिनांक 27 मई 2026 को केंद्रीय खनिज उडऩदस्ता की संयुक्त टीम ने जिला रायपुर, महासमुंद एवं गरियाबंद क्षेत्र अंतर्गत सघन निरीक्षण अभियान चलाया।
निरीक्षण के दौरान रायपुर जिले के विधानसभा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिरदा एवं घिवरा में गौण निम्न श्रेणी चूनापत्थर से भरे 01 हाईवा तथा रेत के 03 हाईवा को वैध अभिवहन पास एवं अनुमति के बिना खनिज परिवहन करते पाए जाने पर अवैध परिवहन का प्रकरण दर्ज किया गया। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए चारों हाईवा वाहनों को जब्त कर संबंधित वाहन चालकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया। जब्त वाहनों को आगामी आदेश तक रायपुर जिले के समीपस्थ विधानसभा एवं खरोरा थाना परिसर में अभिरक्षा में खड़ा कराया गया है। जांच के दौरान केंद्रीय खनिज उडऩदस्ता की संयुक्त जांच टीम एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राज्य में अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। शासन-प्रशासन की सख्ती, बढ़ी चौकसी और सतत निगरानी के कारण अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाही सुनिश्चित की जा रही है।
केंद्रीय उडऩदस्ता टीम की रायगढ़ में भी जरूरत
रायगढ़ जिला रेत व गिट्टी माफियाओं के गोरखधंधे से अछूता नहीं है। जिले से चार प्रमुख नदियां निकलती है, जहां खनिज माफियाओं ने रेत तस्करी के लिए अपने सुरक्षित घाट बना लिए हैं। गर्मी के दिनों में रातभर इन नदियों से रेत का अवैध खनन करते हैं और सुबह होते ही डंपर, हाईवा व ट्रैक्टर के माध्यम से इसका परिवहन किया जाता है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर ग्राम कोतरा के निकट से मांड नदी प्रवाहित होती है, जहां रेत का खनन छोटी-मोटी मशीनों से नहीं बल्कि जेबीसी व पोकलेन लगाकर किया जाता है और इन्हीं के मदद से डंपरों, हाईवा व ट्रैक्टर में लोड किया जाता है। बताया जाता है कि मांड नदी की रेत की डिमांड अत्यधिक होने से इस नदी के किनारे दर्जनभर से अधिक गांव के बीच से ये वाहनें सुबह होते ही अपने परिवहन में जुट जाती है। इसके अलावा केलो नदी के तटिय क्षेत्र से भी रेत का अवैध खनन कर परिवहन किया जा रहा है। वहीं पुसौर क्षेत्र से निकलने वाली महानदी का क्षेत्र भी रेत माफियाओं का अड्डा बना हुआ है। साथ ही घरघोड़ा क्षेत्र में कुरकुट नदी के तटीय इलाके में रातभर रेत का खनन होता है और सुबह होते ही अवैध परिवहन शुरू हो जाता है, ऐसी बात नहीं कि इस गोरखधंधे की जानकारी संबंधित खनिज विभाग को नहीं है। सब कुछ जानते हुए खनिज विभाग की खानापूर्ति की कार्रवाई करना समझ से परे हैं। जबकि कलेक्टर के सख्त निर्देश है कि खनिज पदार्थों की तस्करी पर न केवल अंकुश लगाया जाए बल्कि पूरी तरह से ध्वस्त किया जाए। ऐसा लगता है कि रायगढ़ जिले में भी केंद्रीय खनिज उडऩदस्ता टीम की जरूरत आन पड़ी है, लेकिन उडऩदस्ता टीम की जानकारी मिलते ही स्थानीय विभाग के कुछ लोग अपने तस्कर आकाओं को खबर कर देंगे तो इस केंद्रीय उडऩदस्ता टीम को बैरंग लौटना पड़ सकता है। कुल मिलाकर औचक छापामार कार्रवाई की जाए तो बड़ा मामला उजागर होने की पूर्ण संभावना है।
मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर… केंद्रीय खनिज उडऩदस्ता टीम की छापामार कार्रवाई
सीएम साय के निर्देश पर केंद्रीय खनिज उडऩदस्ता टीम की छापामार कार्रवाई, चूना पत्थर से भरे एक व रेत से लदी तीन हाईवा जब्त



