सारंगढ़। बिलासपुर रेंज के पुलिस महा निरी. रामगोपाल गर्ग के द्वारा हत्या के गंभीर मामलों में विवेचना के स्तर को वैश्विक मानकों के अनुरूप सुधारने और न्यायालयों में सजा की दर बढ़ाने के उद्देश्य से एक विस्तृत योजना, दिशानिर्देश जारी करते हुए रेंज स्तर के पुलिसअधिकारी का एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया। आईजी श्री गर्ग ने स्पष्ट किया है कि पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उसे वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सजा दिलाना है। इस नई रणनीति के तहत बिलासपुर रेंज के पुलिस अधिकारी के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं, जिसमें एक चेकलिस्ट को जारी किया गया है। अब से हत्या के हर प्रकरण के चालान में इस चेकलिस्ट का पालन अनिवार्य होगा। प्रमुख दिशा – निर्देश और नई कार्यप्रणाली ई- साक्ष्य और नए कानूनों का अनुपालन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 105 के तहत अब सभी प्रकार की जप्ती ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से वीडियो ग्राफी की जाएगी। इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और गवाहों के मुकर जाने की स्थिति में भी तकनीकी साक्ष्य प्रभावी रहेंगे।
घटनास्थल पर गोल्डन ऑवर के महत्व को समझते क्षेत्र को तत्काल टेप लगाकर सील किया जाएगा। फोरेंसिक, डॉग स्क्वॉड व फिंगर प्रिंट विशेषज्ञों की उपस्थिति में ही साक्ष्य संकलन होगा। किसी भी साक्ष्य को बिना दास्ताने के छूना प्रतिबंधित रहेगा।विवेचना में मानवीय त्रुटि को शून्य करने के लिए 124 बिंदुओं का एक प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। इसमें एफ आई आर से लेकर चार्ज शीट फाइल करने तक की हर प्रक्रिया का प्रलेखनशामिल है, ताकि बचाव पक्ष को तकनीकी खामियों का लाभ न मिले, विवेचक अब आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स जैसे गूगल टेक आउट, इंटरनेट हिस्ट्री व व्हाट्सएप लॉग्स की बारीकी से जांच करेंगे। घटनास्थल के आसपास के 100 मीटर के दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों की त्रिनयन ऐप के जरिए मैपिंग की जाएगी। सीसी टीवी फुटेज को सीधे डीवीआर से जप्त कर भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) की धारा 63(4)(सी) के प्रमाण पत्र के साथ केस डायरी का हिस्सा बनाया जाएगा।
ष्ठहृ्र एवं जैविक साक्ष्यों से लिंक स्थापित करना मृतक के नाखूनों में फंसे आरोपी की स्किन, संघर्ष के दौरान टूटे बाल और कपड़ों पर मौजूद डीएनए ट्रेस करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वैज्ञानिक रूप से आरोपी की उपस्थिति घटना स्थल पर सिद्ध की जा सके। रात्रि कालीन पोस्टमार्टम एवं वीडियोग्राफी संवेदनशील मामलों में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार पर्याप्त रोशनी में रात में भी पोस्टमार्टम कराया जा सकेगा,जिसकी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी। पीएम रिपोर्ट में स्पष्टता न होने पर डॉक्टर से अनिवार्य रूप से एफएसएल क्वेरी कराई जाएगी।साक्ष्यों के संकलन से लेकर उन्हें थाने के मालखाने और फिर एफएसएल तक भेजने का पल पल का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा,जिस से साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की किसी भी संभावना को खत्म किया जा सके। आईजी बिलासपुर ने कड़े निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 26 के बाद होने वाले सभी हत्या के प्रकरणों की विवेचना इन नए वैज्ञानिक और तकनीकी प्रोटो कॉल के माध्यम से की जाए।
बिलासपुर रेंज पुलिस अब सीसी टीएनएस प्रविष्टि से लेकर साइबर साक्ष्यों के संकलन तक पूरी तरह से पारदर्शी व पेशेवर दृष्टि अपनाएगी ताकि अपराधियों को कानून के शिकंजे में कसकर सख्त सजा दिलाई जा सके। प्रशिक्षण सत्र में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल के अलावा रेंज के सभी जिलों के एएसपी से लेकर उपनिरीक्षक तक सम्मिलित हुए। इस प्रशिक्षण सत्र का संचालन वर्चुअल मुड पर किया गया। आईजीपी श्री गर्ग ने स्वयं पुलिस अधिकारी को हत्या के प्रकरणों की विवेचना के लिए प्रशिक्षक के रूप में मार्गदर्शन देते हुए, पीपीटी के माध्यम से विवेचना के की पॉइंट्स और अमल में लाने वाले महत्व पूर्ण बिंदुओं की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दी। राम गोपाल ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण के सत्र प्रति सप्ताह अलग अलग विषयों पर रेंज के पुलिस अधिकारी के लिए आयोजित किए जाएंगे, ताकि पुलिस अधिकारी नवीन अनुसंधान तकनीकों से खुद को अपग्रेड कर, कमियों को दूर कर सकें।
हत्या के प्रकरणों के अनुसंधान पर महा निरीक्षक गर्ग ने दिया प्रशिक्षण
हत्या के प्रकरणों के अनुसंधान पर महा निरीक्षक गर्ग ने दिया प्रशिक्षण



