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Reading: राजनीति महिलाओं के सम्मान से ऊपर नहीं : ऋतु चौरसिया
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NavinKadam > रायगढ़ > राजनीति महिलाओं के सम्मान से ऊपर नहीं : ऋतु चौरसिया
रायगढ़

राजनीति महिलाओं के सम्मान से ऊपर नहीं : ऋतु चौरसिया

नारी शक्ति वंदन अधिनियम ऐतिहासिक सुधार जो विपक्ष के राजनीतिक स्वार्थ के कारण पूरा न हुआ : डॉ राजीव सिंह, प्रेस वार्ता में कांग्रेस पर जमकर बरसे भाजपा नेता

lochan Gupta
Last updated: April 24, 2026 11:55 pm
By lochan Gupta April 24, 2026
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19 Min Read

रायगढ़। भारतीय सभ्यता के हजारों सालों के इतिहास के साथ ही भारत लोकतंत्र की जननी है। भारत के पास इस सफर में एक नया पहलू जोडऩे का मौका था। हम देश की आधी आबादी को नीति-निर्धारण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने के लिए यह नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाए थे। सदन में विपक्ष द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम खारिज किए जाने के मामले पर आयोजित प्रेस वार्ता में संभाग प्रभारी डॉ राजीव सिंह एवं प्रदेश भाजपा मंत्री ऋ तु चौरसिया ने कहा भाजपा ने सभी सांसदों से आग्रह किया था कि वे इस मौके को हाथ से न जाने दें। हम सब मिलकर देश को एक नई दिशा देने के लिए तैयार थे। यह भारत की नारी शक्ति के लिए एक महायज्ञ था। भाजपा को यह विश्वास था कि इस महायज्ञ का नतीजा न केवल राजनीति का भविष्य बल्कि देश की दिशा और नियति भी तय करेगा।
लेकिन, स्वार्थी विपक्ष, जिसने 30 साल तक राजनीतिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में हमारी महिलाओं की भागीदारी देने में देरी की, ने एक बार फिर इस देश की महिलाओं को निराश किया है। उन्होंने देश को निराश किया। अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की बेचैनी में, ढ्ढहृष्ठढ्ढ ्रद्यद्यद्बड्डठ्ठष्द्ग का स्वार्थ एक बार फिर सामने आया और महिलाओं के हितों को एक बार फिर दरकिनार कर दिया गया। हमारी पीढिय़ों में हमारी दादीयो ने इस विधेयक का इंतजार किया था। हमारी माताओं ने इसकी उम्मीद की थी। हमारी बहन बेटियों ने इस क्षण का इंतज़ार किया था। कांग्रेस और उसके साथियों ने आपकी बेटियों को और 30 साल इंतज़ार करवाया! यह सीटों के बारे में नहीं है; यह भारतीय घर की इज्ज़त के बारे में है जो आखिरकार लोकतंत्र के मंदिर तक पहुँच रही है। हमें इस विषय को लेकर स्पष्ट होना चाहिए कि विपक्ष ने क्या होने से रोका है। उन्होंने सबसे ऊँचे स्तर पर भारतीय महिलाओं के पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) को कमज़ोर किया है। उन्होंने हमारे देश की महिलाओं को टेबल पर सीट मिलने से रोककर अपने राजनैतिक स्वार्थ की रक्षा की। यह कोई राजनैतिक विषय नहीं था। ऐसा कभी नहीं होना था। विपक्ष ने जो किया है, वह देश के सबसे ऊँचे पदों पर बैठी महिलाओं के लिए अपनी नफऱत और तिरस्कार को सबके सामने ला दिया है और शीर्ष नेतृत्व में नीति निर्धारण करने वाली भूमिकाओं में महिलाओं की काबिलियत पर शक करने की और अपनी महिलाओं से घृणा करने वाली सोच को खुलेआम दिखाया है। भाजपा को यह आभास तो था कि विपक्ष ऐसा ही कुछ करेगा। कांग्रेस पार्टी ने पारंपरिक रूप से एक साफ़ महिला-विरोधी रुख बनाए रखा है, जो उसके पुराने साथियों और मौलवियों से प्रेरित है। प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मुस्लिम महिलाओं की पीठ में छुरा घोंपा जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें मुस्लिम पुरुषों को अपनी पत्नियों को गुजारा भत्ता देना ज़रूरी था। मौलानाओं ने हंगामा किया और राजीव गांधी जल्दी से पीछे हट गए। इस बड़े अन्याय को भी नरेंद्र मोदी को ठीक करना पड़ा, जब शाह बानो मामले को पलटने का भूत आखिरकार दफऩा दिया गया, क्योंकि एनडीए सरकार ने ट्रिपल तलाक़ पर बैन लगा दिया। भाजपा नेता द्वय ने कहा कांग्रेस पार्टी और उसके पिछड़े नेताओं ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व और बराबरी के मुद्दे को एक बड़ा झटका दिया है।पंचायत रिज़र्वेशन के मज़ाक का आरोप लगाते हुए कहा विपक्ष पंचायतों में महिलाओं के लिए रिज़र्वेशन का झूठा क्रेडिट लेकर अपनी राजनीतिक सोच को छिपाने की कोशिश करता है। वे यह भूल जाते हैं कि वे पंचायतों में रिज़र्वेशन के लिए आसानी से मान गए क्योंकि इससे उनकी अपनी स्थिति को कोई खतरा नहीं था। लेकिन उन्होंने लोकतंत्र के शीर्ष स्तर पर ऐसा नहीं होने दिया। विपक्ष हमेशा इस बिल के समर्थन में होने का दिखावा करता रहा है। हर बार वे कहते थे ‘हम इसके समर्थन में हैं, लेकिन,’ इसलिए हमेशा एक ‘लेकिन/ लेकिन/ परंतु’ होता है। इस बिल का विरोध करने के लिए वे हमेशा कोई न कोई टेक्निकल बात उठाते हैं और उन्होंने फिर वही किया। इस बार उन्होंने एकजुट भारतीय परिवार में फूट, मनमुटाव और शक पैदा करने के अपने एजेंडे के पीछे छिपने की कोशिश की। उन्होंने भारत को उत्तर और दक्षिण के आधार पर बांटने की कोशिश की, जबकि आसानी से अपने महिला-विरोधी चरित्र को छिपाया। विपक्ष के लिए, महिलाओं के अधिकार और आरक्षण एक मज़ाक और राजनीतिक सुविधा की बात है। हमने आज इसे सामने आते देखा। विपक्ष को महिलाओं से नफऱत की ऐतिहासिक मिसाल बताते हुए डॉ राजीव सिंह ने कहा कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने कई मोर्चों पर बहुत बड़ी गड़बड़ी छोड़ी है। 2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी केंद्र में आए, तो भारतीय महिलाएं बहुत बुरी हालत में थीं। वे खुले में शौच करने के लिए मजबूर थी। उनके पास गैस सिलेंडर नहीं थे; पानी की सप्लाई नहीं थी। घरों की कमी के कारण करोड़ों भारतीय परिवार खुले में सोने को मजबूर थे। महिलाएं बैंकिंग सिस्टम से जुड़ी नहीं थीं और न ही उनके पास फॉर्मल क्रेडिट तक पहुंच थी। यह सब और भी बहुत कुछ पिछले दस से बारह सालों में प्रधानमंत्री मोदी ने हल किया है। विपक्ष ने बस इन कोशिशों का मज़ाक उड़ाया, उनकी बुराई की और उन्हें नाकाम किया। आज, महिलाओं की भलाई से ज़्यादा अपने मतलब के राजनीतिक फ़ायदों को अहमियत देते हुए, हैरान करने वाली बेशर्मी से दिखाया गया, जब सरकार ने यह पक्का करने की कोशिश की कि इस देश की ज़मीनी स्तर से उठती महिलाओं को देश की संसद और विधानसभाओं में उनकी सही जगह मिले, तो विपक्ष ने एक बार फिर इसे पटरी से उतार दिया। भाजपा नेता राजीव ने विश्वास जताते हुए कहा हमारे लिए यह कभी भी राजनीतिक क्रेडिट लेने का विषय नहीं था। बल्कि हमने पूरी संसद से सपोर्ट मांगा था। हमने विपक्ष से वादा किया था कि वे इस कदम का पूरा क्रेडिट ले सकते हैं क्योंकि हम असल में महिला सशक्तिकरण चाहते थे। भाजपा देश की माताओं, बहनों और बेटियों की भलाई, उनके उत्थान और उनके अधिकारों और सम्मान को पक्का करने के लिए समर्पित हैं। यह हमारे लिए पॉलिटिक्स नहीं है; यह भारत माता और नारी शक्ति की सेवा में एक सिद्धांतों वाला नज़रिया है।महिला विरोधी ताकतें आज रात भले ही जीत गई हों, लेकिन महिलाओं के लिए हमारा समर्पण विपक्ष की सत्ता की भूख से ज़्यादा मज़बूत है। हमारे साथ करोड़ों महिलाओं का आशीर्वाद है, जो भारत की महिलाओं को उनका हक़ दिलाने के हमारे सफऱ में हमारा मार्गदर्शन और साथ देगा विपक्ष द्वारा महिलाओं के राजनैतिक प्रतिनिधित्व को नुकसान पहुँचाने का इतिहास बताते हुए ऋतु चौरसिया ने कहा महिला रिज़र्वेशन बिल पहली बार 1996 में एचडी देवेगौड़ा सरकार के तहत पेश किया गया था। इसे एक पार्लियामेंट्री कमेटी के पास भेजा गया। रिपोर्ट आई। सरकार गिर गई। बिल वहीं रुक गया। यही टेम्पलेट था और कांग्रेस अगले अठारह सालों में इसे और बेहतर बनाती रही।1998 और 2003 के बीच, श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की एनडीए सरकार ने बिल पास करने की चार अलग-अलग कोशिशें कीं। हर कोशिश को भाजपा ने नहीं, बल्कि उन्हीं गठबंधन सहयोगियों ने नाकाम किया जिनके साथ कांग्रेस अब खड़ी है। समाजवादी पार्टी ने सदन के वेल में घुसकर हंगामा किया। राबड़ी देवी की पार्टी आरजेडी ने चालाकी से बिल को रोक दिया। उनका बताया गया कारण: पहले ओबीसी कोटा लाएं। महिलाएं इंतज़ार कर सकती हैं।1998 में, आरजेडी एमपी सुरेंद्र प्रकाश यादव ने संसद में महिला रिज़र्वेशन बिल का डॉक्यूमेंट छीनकर फाड़ दिया। यह विरोध नहीं था। यह अपमान था। फिर कांग्रेस की यूपीए आई। पूरे दस साल। 2004 से 2014 तक। सोनिया गांधी कमान संभाले हुए थीं। महिलाओं के अधिकारों की खुद को चैंपियन बताती थीं।2010 में, राज्यसभा ने बिल पास कर दिया। खड़े होकर तालियां बजाई गईं। सोनिया गांधी की फोटो खींची गई जिसमें वह भावुक दिख रही थीं। राज्य सभा ने अपना पक्ष रख दिया था लेकिन लोकसभा में बिल कभी पेश नहीं हुआ। 2010 से 2014 तक पेश नहीं किया गया। पूरे चार साल राज्यसभा की मंजूरी के साथ यह बिल पड़ा रहा बस ज़रूरत थी इसे पारित करने की। लेकिन कांग्रेस और उसके साथियों में ऐसा नहीं किया। 2010 में, जब राज्यसभा में बिल पर बहस हो रही थी, तो कांग्रेस के सबसे ज़रूरी पॉलिटिकल पार्टनर में से एक मुलायम सिंह यादव ने पार्लियामेंट में खड़े होकर महिला सांसदों के खिलाफ़ अपशब्द कहे। आज इन सभी दलों ने फिर अपना महिला विरोधी चेहरा सबके सामने रखा है।
प्रेस वार्ता में महिलाओं के ना होने का छाया रहा मुद्दा
जिला भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष मधुलता महामंत्री रेखा महामिया ने प्रेस वार्ता के दौरान संयुक्त रूप से कहा महिला आरक्षण को लेकर जिला कांग्रेस की प्रेस वार्ता में एक भी महिलाएं नहीं थी। महिला नेताओं ने कहा कांग्रेस के पास महिला नेताओं का टोटा है या महिलाएं कांग्रेस से क्यों जुडऩा नहीं चाहती इसका कांग्रेस को चिंतन करना चाहिए। जिला भाजपा अध्यक्ष अरुण धर दीवान,महिला मोर्चा अध्यक्ष श्रीमति मधुलता पटेल,जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमति शिखा गवेल, एम आई सी सदस्य श्रीमति पूनम सोलंकी,श्रीमति हेमलता चौहान,श्रीमति गायत्री केशरवानी,महिला मोर्चा मंत्री श्रीमति रेखा महमिया,श्रीमति लक्ष्मी विश्वास,श्रीमति दीपमाला गुप्ता,श्रीमति दीपमाला महंत,श्रीमति मीनाक्षी मेहर,श्रीमति पूर्णिमा दास भाजयुमो अध्यक्ष सुमित शर्मा,शहर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, सहित भाजपा के पदाधिकारियों की मौजूदगी रही।

महिलाओं को सशक्त बनाने वाली प्रमुख योजनाएं

मोदी सरकार ने “”Women-led Development”को मंत्र बनाकर सिर्फ आरक्षण नहीं, बल्कि जन्म से लेकर उद्यम तक महिलाओं के लिए योजनाएं चलाईं। महिलाओं के स्वास्थ्य और मातृत्व सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना 2017 के तहत जीवित बच्चे के लिए गर्भवती/धात्री माता को रू. 5000 की मदद शुरू की है अब तक 3.5 करोड़ से अधिक महिलाओं को रू. 14,500 करोड़ का डीबीटी से मिला। जननी सुरक्षा योजना हेतु प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान प्रारम्भ किया गया।इसके तहत हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती की फ्री जांच, हाई-रिस्क केस की पहचान की जाती है इस योजना का सुखद पहलू यह है कि मातृ मृत्यु दर 130 से घटकर 97 प्रति लाख हुई। आयुष्मान भारत 2018 योजना के तहत 5 लाख तक फ्री इलाज की सुविधा दी गई इस कार्ड में 49त्नमहिला लाभार्थियों के नाम शामिल है इस योजना के तहत सिजेरियन, ब्रेस्ट-कैंसर, सर्वाइकल कैंसर का इलाज संभव हो सका है। महिलाओं को रसोई से धुआं मुक्ति और सुविधा देने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 2016 के तहत गरीब परिवार की महिला मुखिया के नाम फ्री एलपीजी कनेक्शन दिया गया अब तक 10.35 करोड़ कनेक्शन प्रदान किए गए। डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के लागू होने से 4 लाख महिलाओं की अकाल मृत्यु टली है। हर घर जल, जल जीवन मिशन 2019 के तहत नल से पानी दिए जाने की योजना शुरू की गई ताकि 70त्न काम काजी महिलाओं के सिर से पानी का बोझ हटाया जा सके। इस योजना के तहत 15 करोड़ घरों में नल, रोज से 5.5 करोड़ महिलाओं के हर दिन 2 घंटे बच पाए आर्थिक स्वावलंबन और उद्यमिता हेतु मुद्रा योजना- 2015 के तहत बिना गारंटी 10 लाख तक लोन दिया गया अब तक कुल 45 करोड़ लोन में से 68 प्रतिशत लोन महिला उद्यमियों को दिया गया जिसके 30 करोड़ महिलाएं लाभान्वित हुई। स्टैंड-अप इंडिया 2016 के तहत एसटी/एससी और महिला को 10 लाख से 1 करोड़ तक लोन, ग्रीनफील्ड एंटरप्राइज के लिए दिया गया। लखपति दीदी योजना 2023 के तहत स्वयं सहायता समूह की 3 करोड़ महिलाओं को स्किल देकर सालाना 1 लाख से अधिक कमाई तक की योजना बताई गई। इस योजना से 1 करोड़ महिलाएं अब तक ‘लखपति दीदी’ बन चुकी है। ड्रोन दीदी योजना 2023 के तहत 15,000 महिला एसएचजी को ड्रोन ट्रेनिंग दी गई जिससे खेती में दवा छिडक़ाव से प्रति महिला रू.1 लाख रुपए सलाना कमाई सम्भव हो पाई। शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ 2015 के तहत लिंगानुपात सुधार किया गया जिसका वजह से जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढक़र 937 हुआ।सुकन्या समृद्धि योजना 2015 के तहत 10 साल तक की बेटी के नाम 7.6त्न ब्याज वाला खाता खोला गया जो बेटी के 21 साल में मैच्योर होगा इस योजना के तहत 4 करोड़ खाते, में 2.3 लाख करोड़ जमा किए गए। डिजिटल साक्षरता के तहत 6 करोड़ ग्रामीणों को डिजिटल ट्रेनिंग दी गई जिसमें, 52 प्रतिशत महिलाएं शामिल है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून को मजबूत बनाया गया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के तहत लोकसभा-विधानसभा में महिलाओं के लिए 33त्न आरक्षण निश्चित किया। तीन तलाक कानून 2019 के तहत तीन तलाक गैर-कानूनी बनाया गया 3 साल सजा का प्रावधान करते हुए लाखों मुस्लिम महिलाओं को राहत दी गई।महिला हेल्पलाइन 181 के साथ वन स्टॉप सेंटर योजना के तहत हिंसा पीडि़त महिला को 1 छत के नीचे पुलिस, कानूनी, मेडिकल, काउंसलिंग मुहैया कराई गई इसे हेतु 700 सेंटर बनाए गए। महिला सुरक्षा प्रोजेक्ट के लिए निर्भया फंड के तहत 10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया। दिल्ली में 15,000 सीसीटीव्ही, बसों में पैनिक बटन लगना अनिवार्य किया गया। रोजगार में भागीदारी बढ़ाने के लिए भी मोदी सरकार ने सेना-पुलिस में भागीदारी बढ़ाने के लिए एनडीए, सैनिक स्कूल, फाइटर प्लेन, युद्धपोत में बेटियों की एंट्री का प्रावधान किया। इस वजह से सेना में महिला अफसर की संख्य 3000 से बढक़र 2024 में 10,000 से अधिक हो गई।मातृत्व अवकाश वृद्धि 2017 के तहत अवकाश की समयावधि 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते पेड लीव का प्रावधान किया गया यह अवधि पूरे विश्व में भारत में सबसे ज्यादा है। महिला पुलिस बटालियन सीएपीएफ में 33 प्रतिशत भर्ती का लक्ष्य रखा गया जिसमें 2014 में 1.03 लाख महिला पुलिस 2024 में बढक़र 2.15 लाख हो गई। आवास और संपत्ति में हक देने के लिए पीएम आवास योजना के तहत घर की रजिस्ट्री महिला के नाम पर या संयुक्त रूप से किया जाना अनिवार्य किया गया। इस योजना के तह 3 करोड़ घरों में 72त्न घरों में मालिक/सह-मालिक महिलाएं बन सकी। स्वामित्व योजना के तहत गांव में प्रॉपर्टी कार्ड, महिलाओं को संपत्ति का कानूनी हक का प्रावधान किया गया। सामाजिक सम्मान के तहत स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत 12 करोड़ शौचालय बनाए गए। इज्जत घर (2 बनने से महिलाओं की सुरक्षा-गरिमा बढ़ी। 93त्न महिलाओं ने इस योजना के लागू होने से सुरक्षा महसूस हुई। मोदी सरकार ने 4 ‘एस’ का मॉडल बनाया है जिसमें सुरक्षा, सुविधा, सम्मान, स्वावलंबन।शामिल है तीन तलाक, 33त्न आरक्षण, वन स्टॉप सेंटर से महिला सुरक्षित हुई है। उज्ज्वला, जल जीवन, मातृ वंदना योजना से महिलाओं को सुविधा मिली है।स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ से महिलाओं को सम्मान बढ़ा है .मुद्रा, लखपति दीदी, ड्रोन दीदी, सुकन्या से महिलाएं स्वावलंबी बनी है। वल्र्ड बैंक 2024 रिपोर्ट के अनुसार भारत में महिला श्रम भागीदारी 2017 में 23 प्रतिशत थी जो मोदी सरकार आने के बाद 2024 में 37 प्रतिशत हुई। 10 करोड़ महिलाएं पहली बार बैंकिंग सिस्टम से जुड़ीं। मोदी सरकार का संदेश है कांग्रेस ने 60 साल में ‘महिला विकास’ की बात की, मोदी सरकार ने ‘महिला के नेतृत्व में विकास’ करके दिखाया।

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