नीयत साफ हो, तो कुर्सी कोई भी हो, काम सिर्फ देश का होता है, अब वित्तमंत्री ओपी चौधरी दे रहे प्रदेश को नई दिशा
रायगढ़। 21 अप्रैल सिविल सर्विस डे के दिन हर छत्तीसगढ़ वासी एक ऐसी शख्सियत को याद कर रहा है, जिसने प्रशासनिक सेवा के सोने के सिंहासन को छोडक़र जनता के बीच जाकर सेवा का संकल्प लिया और आज प्रदेश के सफल वित्त मंत्री के रूप में छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को तन मन धन समर्पित भाव से भजबूत बना रहे हैं। ओपी चौधरी का नाम प्रदेश की राजनीति में परिचय का मोहताज नहीं। 21 अप्रैल का वो दिन जब 2005 बैच के आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी रायपुर कलेक्टर के रूप में अपनी कार्यशैली, शिक्षा क्रांति और ‘नालंदा परिसर’ जैसी पहल के लिए देशभर में चर्चित हुए। लेकिन 21 अगस्त 2018 को उन्होंने चौंकाते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया और भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्होंने कहा था ‘आईएएस बनकर मैंने कई जिले की सेवा की, अब जनप्रतिनिधि बनकर पूरे छत्तीसगढ़ की सेवा करूंगा। नीति बनाने की ताकत जनता से मिलती है, फाइल से नहीं।’ सिविल सर्विस डे पर उनका यह निर्णय हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है। सबसे कठिन विधान सभा खरसिया से पहला विधानसभा चुनाव लड़ा, हार कर भी जनता का दिल जीत लिया, इसके बाद 2023 में रायगढ़ विधानसभा से चुनाव लड़ा और प्रदेश में सबसे अधिक मतों से जीतने का रिकॉर्ड बना कर वित्त मंत्रालय तक पहुंचे।
2018 में खरसिया से चुनाव लड़े, हार के बाद भी जनता के बीच डटे रहे। 2023 में रायगढ़ से ऐतिहासिक जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन पर भरोसा जताते हुए वित्त, वाणिज्यिक कर,आवास-पर्यावरण और योजना-आर्थिक सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी।
उनके आईएएस का अनुभव, वित्त में दिख नवाचार के रूप में नजर आ रहा है । हस्तलिखित बजट के जरिए पूरे देश में प्रसिद्धि पाने वाले वित्त मंत्री ओपी ने सीजी बजट ऐप और पेपरलेस बजट पेश किया। आईएएस वाली तकनीकी विजन से छत्तीसगढ़ का पहला डिजिटल बजट पेश किया। राजकोषीय अनुशासन का मिथक स्थापित करने वाले ओपी को विरासत में कर्ज में मिला इसके बावजूद एक साल में राजस्व घाटा 3 प्रतिशत से घटाकर 1.8 प्रतिशत पर लाए। गरीब-कल्याण केंद्रित बजट में महतारी वंदन योजना के लिए 12,000 करोड़, नियद नेल्ला नार योजना से बस्तर में सडक़-स्कूल, युवाओं के लिए सीजी रोजगार मिशन का प्रावधान किया। फाइलों में योजनाएं नहीं अटकतीं। कलेक्टर रहे हैं, इसलिए जानते हैं कि जमीन पर पैसा कैसे पहुंचता है।
आज सिविल सेवा दिवस पर सचिवालय में अधिकारियों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा था कि मैं भी आप ही की तरह इस स्टील फ्रेम का हिस्सा रहा हूँ। वर्दी बदल गई, पर वैल्यू सिस्टम वही है। मेरा मानना है आईएएस का मतलब ढ्ढ ्रद्व द्घशह्म् स्शष्द्बद्गह्ल4’ । चाहे कलेक्टर की कुर्सी हो या मंत्री की, जनता का पैसा जनता तक ईमानदारी से पहुंचे, यही असली जनसेवा है। आप लोग फाइल पर साइन करते समय गांव के उस अंतिम व्यक्ति का चेहरा याद रखें।
भाजपा कांग्रेस की राजनीति का यह अंतर है कि कांग्रेस में अफसर रिटायर होकर राज्यसभा जाते हैं। भाजपा में अफसर जनता के बीच जाकर तपस्या करते हैं। ओपी चौधरी जी इसका जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने एसी कमरा छोडक़र खरसिया की धूप में पसीना बहाया। आज वही अनुभव छत्तीसगढ़ का बजट बना रहा है। सिविल सर्विस डे 2026 पर ओपी चौधरी की कहानी हर युवा अफसर को यह संदेश देती है कि सेवा का माध्यम बदल सकता है, सेवा का संकल्प नहीं’। कलेक्टर रहते जिस नालंदा परिसर से उन्होंने हजारों बच्चों का भविष्य संवारा, वित्त मंत्री बनकर अब वे पूरे छत्तीसगढ़ का भविष्य गढ़ रहे हैं। आईएएस से एफएम तक का यह सफर बताता है- जब नीयत साफ हो, तो कुर्सी कोई भी हो, काम सिर्फ देश का होता है।



