रायगढ़। खरसिया नगर पालिका में निवासरत लोकप्रिय कर्मठ शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन में लंबी सेवा दे चुके श्रीराधेश्याम शर्मा को सेवानिवृत्ति उपरांत हिंदी भाषा एवं साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा गया। यह मानद उपाधि इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान बालाघाट मध्य प्रदेश के पुरातत्व कार्यालय में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत 18 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र गहरवार इतिहास एवं पुरातत्व शोध भारत कैंप बालाघाट द्वारा अधिक अधिक संख्या में उपस्थित लोगों के बीच प्रदान किया गया।
छात्र जीवन से ही मेधावी रहे श्री शर्मा ने वर्ष 1971 में रायगढ़ जिला प्राथमिक परीक्षा प्रमाण पत्र में मेरिट स्थान प्राप्त कर मेरिट स्कॉलरशिप 3 वर्षों तक प्राप्त किया। श्रीशर्मा पांचवी आठवीं 11वीं बीए एवं एमए हिंदी सभी में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होकर शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक से लेकर प्राचार्य तक का दायित्व कुशलता पूर्वक निभाया। श्रीशर्मा 1993 में साक्षरता अभियान के अंतर्गत परियोजना समन्वयक एवं सचिव तहसील साक्षरता समिति खरसिया में उल्लेखनीय कार्य किया। 2010 में क्षेत्र संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग कलेक्टर कार्यालय रायगढ़ के पद पर उन्होंने काम किया, उन्हे संपूर्ण जिले का मध्यान भोजन जिला नोडल अधिकारी का दायित्व भी सौंपा गया, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक पूर्ण किया। इसके साथ ही कटे-फटे होंठो के बच्चों के इलाज के लिए इनको जिला प्रभारी बनाया गया, जिसे इन्होंने अनेक बच्चों के कटे-फटे वोटो का ऑपरेशन करवाया।
राजीव गांधी शिक्षा मिशन जो अब समग्र शिक्षा के नाम से जाना जाता है, श्रीशर्मा ने 2011 में बीआरसी सारंगढ़ तथा 2012 एवं 13 में बीआरसी लैलूंगा तथा 2014 से 2019, 5 वर्ष 2 माह से अधिक समय तक बीआरसी खरसिया में मिशन कार्यों को कुशलता पूर्वक संपादित किया। श्रीशर्मा के दीर्घ अनुभव को देखते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ शासन ने सितंबर 2019 से 27 मई 2022 तक सहायक कार्यक्रम समन्वयक समग्र शिक्षा जिला कार्यालय जांजगीर में प्रदान किया तथा छत्तीसगढ़ शासन ने उनके दीर्घ अनुभव और मेहनत को देखते हुए सेवानिवृत्ति पश्चात फरवरी 2023 से 31 जनवरी 2024 तक के लिए पुन: सहायक कार्यक्रम समन्वयक समग्र शिक्षा जिला जांजगीर का दायित्व संविदा रूप से नियुक्ति के तहत दिया गया। कलेक्टर जांजगीर ने उनके अनुभव का लाभ उठाते हुए नए जिला शक्ति में इन्हें जिला नोडल अधिकारी समग्र शिक्षा का दायित्व सौंपा। इस प्रकार श्रीशर्मा 45 वर्ष तक शिक्षा विभाग में लंबी सेवा देकर देकर अनेक सामाजिक साहित्यिक धार्मिक रचनात्मक कार्यों में सक्रियता रखकर सोहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण किया। श्रीशर्मा की पत्रकारिता लेखन में भी रुचि रही, इन्हीं सबके मद्दैनजर श्रीशर्मा को पीएचडी की उपाधि से नवाजा गया। अब श्रीशर्मा डॉ.राधेश्याम शर्मा के नाम से जाने जाएंगे।
राधेश्याम शर्मा को हिंदी एवं साहित्य में डॉक्टरेट अवार्ड से नवाजा गया



