रायगढ़। अक्षय तृतीया या आखातीज वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि होती है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं उनका अक्षय फल मिलता है, इसी दिन माता रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम जी के रूप में जन्म लिया, भगवान श्री परशुराम जी के सभी मंदिरों में अक्षय तृतीया को परशुराम जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है, इस दिन भगवान परशुराम जी की पूजा करने का अपना अलग ही महत्व है, इस दिन जन्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय भृगुवंशी भगवान श्री परशुराम जी का जन्म हुआ है,अक्षय तृतीया सामाजिक व संस्कृति का अनूठा त्यौहार है, यीशु भजन कृषक कृषि उपज आदि के शगुन देखते हैं राजपूत समुदाय आने वाला वर्ष सुखमय म्हो इसलिए इस दिन आखेट- मृगया पर जाने की परंपरा का निर्वाह करते हैं, राजस्थान में इस दिन वर्षा के लिए शगुन निकाला जाता है, अक्षय तृतीया की की युगादितिथियो में गणना होती है,सतयुग एवं त्रेता युग का प्रारंभ भी इसी तिथि को हुआ था, भगवान श्री बद्रीनारायण के कपाट इसी तिथि से पुन खुलते हैं,श्री बांके बिहारी जी मंदिर के विग्रह के चरण दर्शन इसी पुण्यमयी तिथि अक्षय तृतीया के दिन होते हैं।
अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व है, ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है,जो कभी समाप्त न हो इस दिन किया गया हर शुभ कार्य पूजा, दान और निवेश जीवन भर फल देता है,और कई गुना बढ़ता है, पौराणिकता के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है, अक्षय तृतीया को आखातीज भी कहा जाता है। यह एक स्वयं सिद्ध मुहूर्त है, इस दिन किया गया पूजा पाठ, दान, तप, का फल कभी समाप्त नहीं होता,बहुत सी प्रमुख कथाए इस दिन से जुड़ी हुई है,सुदामा द्वारा कृष्ण से भेट, एवं भगवान श्री कृष्ण द्वारा सुदामा को अक्षय धन देना, श्री कृष्ण द्वारा द्रौपदी को अक्षय पात्र प्रदान करना, माता अन्नपूर्णा का प्राकट्य,एवं गंगा अवतरण अक्षय तृतीया के दिन हुआ है, इस संयम सिद्ध मुहूर्त के दिन कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, आभूषण एवं जमीन खरीदी, बिना पंचांग दिखाएं किया जाता है।
यह दिवस सफलता व सौभाग्य का प्रतीक है, एवं धन एवं समृद्धि से जुड़ा है, इस दिन पितरों को किया गया तर्पण तथा पिंडदान एवं किसी भी प्रकार का दान अक्षय फल प्रदान करता है, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में गंगा में स्नान कर भगवान पूजन से सभी पाप नष्ट होते हैं,इस दिन पानी से भरा घड़ा, अन्न,फल, भूमि,स्वर्ण इत्यादि का दान किया जाता है, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदाई मानी गई है, हम सभी को इस पावन पुण्य मयी तिथि का विशेष लाभ लेना चाहिए एवं अपने घरों में शाम के समय दिए भी जलाना चाहिए। सभी को अक्षय- तृतीया पर्व,एवं परशुराम जन्मोत्सव की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
शुभ मुहूर्त और दान एवं अक्षय पुण्य का महापर्व अक्षय तृतीया
शुभ मुहूर्त और दान एवं अक्षय पुण्य का महापर्व अक्षय तृतीया



