घरघोड़ा। रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें न तो शासन का खौफ है और न ही प्रशासन की कार्रवाई का डर। घरघोड़ा क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली कुरकुट नदी इन दिनों माफियाओं की अवैध कमाई का जरिया बन चुकी है। दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक, धड़ल्ले से रेत की चोरी की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि बिना ‘ऊपरी संरक्षण’ के इतना बड़ा अवैध कारोबार संचालित होना नामुमकिन है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध रेत परिवहन की जानकारी होने के बावजूद माइनिंग विभाग और पुलिस प्रशासन की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। भारी वाहनों की आवाजाही से गांव की सडक़ें बदहाल हो रही हैं, लेकिन माफियाओं के रसूख के आगे आम जनता बेबस है।



