रायगढ़। कहते हैं अगर लगन सच्ची हो और जुनून गहरा हो तो, गांव की मिट्टी से प्रतिभा की ऐसी खूशबू उठती है जो पूरे देश में फैल जाती है ऐसी प्रेरणादायक कहानी मिलेंगे ग्राम भेंगारी की टिकेश्वर पटेल ने, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और समर्पण के दम पर न केवल क्षेत्र में नाम रोशन किया है बल्कि छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग के लिए एक नई इबारत लिखने का भी काम किया है। हाल ही में पिछले वर्ष शिक्षक पटेल ने नवोदय विद्यालय सैनिक स्कूल, जवाहर उत्कर्ष एकलव्य जैसे चुनिंदा स्कूलों के 25 से 30 छात्रों का चयन कराकर इतिहास रच दिया था। जिसके फल स्वरुप पिछले वर्ष 102 छात्रों का अभी तक नवोदय में चयन होने पर राज्य के सबसे बड़े शिक्षक सम्मान ‘राज्यपाल पुरस्कार’ से सम्मानित हुए थे! वह क्षेत्र के लिए एवं शिक्षा विभाग के लिए वह सबसे बड़ी गौरव की बात है।
प्रतिभाओं की नर्सरी के रूप में जाना जाता है इनका स्कूल
आपको विदित होगा कि शिक्षक पटेल पहले जहां भी सेवाएं दे रहे थे, वहां के दर्ज संख्या पहले बहुत कम थी। दर्ज संख्या बढ़ाने के लिए अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जिससे सफल हुए और आज शिक्षक पटेल के आने पर इनके पूर्व स्कूल चारमार की दर्ज संख्या में उत्तरोंतर वृद्धि होकर 37 से 82 हो गई उनकी 12 वर्ष की लंबी शिक्षकीय वर्ष में अनेक प्रयास किए, जो सफलता की ओर अग्रसर होते हुए एक नए मुकाम पर पहुंचे और राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित हुए!
विशेष प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जाना जाता है यह स्कूल
सबसे बड़ी उल्लेखनीय बात यह है कि रायगढ़ जिले के इस सरकारी स्कूल से पिछले वर्ष 6 छात्र-छात्राओं का नवोदय विद्यालय भूपदेवपुर के लिए, सैनिक स्कूल अंबिकापुर, जवाहर उत्कर्ष के लिए रूंगटा पब्लिक स्कूल भिलाई एवं संस्कार स्कूल राजनांदगांव तथा जिले के एकलव्य स्कूल में चयन हुआ है। जिससे पिछले 16 वर्षों में इनके पढ़ाए 114 छात्र-छात्राओं का नवोदय में चयन 21 छात्र/ छात्राओं का सैनिक स्कूल में, जवाहर उत्कर्ष में 14 छात्रों का, एवं एकलव्य में 82 बच्चों का चयन हुआ है। जिससे यह स्कूल में पढऩे वाले बच्चे को शिक्षा के साथ संस्कार एवं खेल पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस विद्यालय में हर महीने की अंतिम शनिवार को मासिक टेस्ट लिया जाता है। जिससे उनके काम की प्रगति की समीक्षा जाती है। प्राइवेट विद्यालय की तर्ज पर दीपावली एवं शीतकालीन अवकाश में अतिरिक्त क्लास लगाई जाती है। अंग्रेजी एवं सामान्य ज्ञान पर विशेष फोकस किया जाता है नतीजा यह है कि पिछले 16 वर्षों में कोई न कोई छात्र नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, एकलव्य स्कूल एवं जवाहर उत्कर्ष जैसे प्रतियोगी परीक्षा में में गांव के इस सरकारी स्कूल से शत प्रतिशत प्रतिवर्ष छात्रों का चयन तय माना जाता है!
नवोदय विद्यालय प्री मॉडल टेस्ट परीक्षा, बच्चों के लिए बने सरलतम मार्ग
घरघोड़ा विकासखंड में पहली बार नवोदय विद्यालय ‘प्री मॉडल’ टेस्ट पेपर दिया गया जिसमें हमारे घरघोड़ा विकासखंड के अनुविभागीय अधिकारी श्री दुर्गा प्रसाद सिंह आई.ए.एस. एवं संतोष कुमार सिंह पूर्व विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी के कुशल मार्गदर्शन एवं मनोज प्रधान के सुझाव तथा सभी संकुल समन्वयक के सहयोग से शिक्षक पटेल के उत्कृष्ट सोच से ओरिजिनल ओ.एम.आर शीट में नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा प्री टेस्ट आयोजन हुआ। जो विद्यार्थी के लिए लाभदायक एवम् हितकर साबित हुआ।
विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा हेतु सशक्त संचारक बनाकर जटिल विषयों को सहज बनाया
छत्तीसगढ़ में नवोदय गुरु के नाम से प्रसिद्ध टिकेश्वर पटेल 16 जून 2005 से सेवा यात्रा की शुरू की थी। दो दशक से अधिक लंबे सफर में उन्होंने बच्चों के शिक्षा के मुख्य धारा से जोडक़र उनके सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया। खेल, संस्कारिक शिक्षा, नैतिक शिक्षा, सांस्कृतिक गतिविधियां आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को कक्षा में लागू पर शिक्षक को रोचक बनाया और विभिन्न ‘मैथ्स ट्रिक्स’ अपना कर विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षा के लिए वनांचल में एक ऐसा अभ्यास शुरू किया। जिससे प्रतिवर्ष 10 से 15 बच्चे नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, एकलव्य स्कूल में चयन होकर छत्तीसगढ़ में रायगढ़ जिले उपलब्धियां पर खड़ा किया।सबसे बड़ी गौरव की बात यह है की इस सरकारी स्कूल में जिले के बच्चे अलावा अन्य ब्लॉक एवं जिले के बच्चे भी यहां पढऩे आ रहे। साथ ही शाला समय के अतिरिक्त निशुल्क कोचिंग क्लास लगाकर बच्चों को मुफ्त में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं जिससे अभी तक सैकड़ो बच्चों ने राज्य के चुनिंदा स्कूलों में चयन होकर अपने गांव का नाम रोशन किया है।
एक ही सरकारी स्कूल से तीन छात्रों का नवोदय एवं सैनिक स्कूल में चयन
विद्यालय का वातावरण तभी वास्तविक अर्थों में शिक्षा का प्रांगण बन सकता है, जब उसकी वायु में सृजनशीलता, अनुशासन और सौहार्द का समन्वय व्याप्त हो। यदि विद्यालय के कक्ष और आँगन ज्ञान, नैतिकता और संस्कारों के अमृत से सिंचित हों, तभी प्रत्येक बालक का चित्त अध्ययन की ओर आकृष्ट होता है। अत: आवश्यक है कि हम ऐसा शैक्षणिक परिवेश निर्मित करें, जहाँ विद्यालय केवल पठन-पाठन का स्थल न होकर जिज्ञासा, आत्मविकास और राष्ट्रनिर्माण की प्रयोगशाला सिद्ध हो। तभी प्रत्येक बालक हर्षपूर्वक कह सकेगा- ‘मेरा विद्यालय ही मेरा सच्चा आलोक है। इस प्रकार गांव का सरकारी स्कूल नवापारा टेंडा से जिगर राठिया, टंकित पटेल एवं टिकेश्वर पटेल का नवोदय विद्यालय एवं सैनिक स्कूल में चयन होकर क्षेत्र के लिए एक मिशाल पेश की है।
क्या कहते हैं शिक्षक पटेल
कक्षा मेरे लिए केवल पढ़ाने का स्थान नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है जहाँ विचारों का आदान-प्रदान होता है, जिज्ञासाएँ जन्म लेती हैं और नवाचार को पंख मिलते हैं। विद्यार्थियों की उत्सुकता और उनकी नई सोच मुझे निरंतर बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। यह सम्मान मेरे लिए गर्व का विषय जरूर है, लेकिन मैं इसे केवल अपनी उपलब्धि नहीं मानता। यह उन सभी गुरुजनों को समर्पित है, जिनसे मैंने मार्गदर्शन प्राप्त किया, जिन्होंने मुझे सही दिशा दिखाई और शिक्षा के प्रति समर्पण सिखाया। साथ ही, यह मेरे सहकर्मियों और साथियों का भी सम्मान है, जिनके सहयोग, प्रेरणा और अनुभवों से मैंने हर कदम पर कुछ नया सीखा। ‘मैं विश्वास करता हूँ, कि एक शिक्षक का वास्तविक सम्मान तभी है, जब वह अपने विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सके। यही सोच मुझे आगे बढऩे और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर नवाचार करने के लिए प्रेरित करती है।’



