रायगढ़। जिले के उत्खनन प्रभावित वनांचल क्षेत्र घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा और धरमजयगढ़ विकासखंड की तस्वीर अब तेजी से बदलने जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप सुदूर एवं आदिवासी बहुल ग्रामों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। सुदूर एवं आदिवासी बहुल ग्रामों को अब मजबूत और टिकाऊ सडक़ों से संपर्क जोडऩे जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप ग्रामीण अंचलों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से 32 करोड़ 12 लाख 21 हजार रुपए की लागत से 14 सडक़ निर्माण एवं मरम्मत कार्य प्रगतिरत हैं।
इन परियोजनाओं का लक्ष्य केवल सडक़ निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सुदूर वनांचल क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करना है। लंबे समय से कच्चे, उबड़-खाबड़ और बरसात में बाधित होने वाले मार्गों के कारण ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंचने में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब इन सडक़ों के निर्माण से बारहमासी आवागमन सुनिश्चित हो सकेगा और ग्रामीण जीवन में व्यापक सकारात्मक बदलाव आएगा।
धरमजयगढ़ विकासखंड में सेमीपाली से कोंध्रा, ससकोबा मेन रोड से पाराघाटी, ससकोबा पाराघाटी रोड से बैगापारा तथा ग्राम पंचायत पुसल्दा से चितापाली तक सडक़ एवं रिटर्निंग वॉल निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। तमनार विकासखंड में पतरापाली से बरकसपाली, अमलीढोढ़ा पीएमजीएसवाई रोड से समकेरा गौरबहरी, पालीघाट तमनार से जोबरो, टी-10 बरकसपाली से रेगालबहरी तथा कांटाझरिया से सलिहारी तक मार्ग निर्माण कार्य संचालित हैं।
घरघोड़ा क्षेत्र में तुमीडीह से छर्राटांगर, कुडुमकेला से पुरी तथा घरघोड़ा-लैलूंगा मुख्य मार्ग से कुरुंजखोल तक सडक़ निर्माण कार्य जारी है। लैलूंगा विकासखंड में गहनाझरिया-सुकवासुपारा से लभनीपारा और खरसिया विकासखंड में खडग़ांव से गोड़पार बस्ती तक सडक़ निर्माण कार्य प्रगति पर है। इन मार्गों के तैयार होने से दर्जनों गांवों का सीधा संपर्क मुख्य सडक़ों से स्थापित होगा और आंतरिक ग्रामीण संपर्क मार्गों को स्थायी मजबूती मिलेगी।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने पिछले दिनों जिलें के सुदूर वनांचल क्षेत्र तमनार विकासखंड अंतर्गत डीएमएफ मद से स्वीकृत पतरापाली से बरकसपाली मार्ग का स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप कराने के सख्त निर्देश दिए। सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच करने तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि सडक़ों का यह नेटवर्क आदिवासी एवं दूरस्थ ग्रामों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ेगा। विद्यार्थियों को विद्यालय और महाविद्यालय तक पहुंचने में सुविधा होगी, मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी और किसानों को अपनी उपज मंडियों तक ले जाने में सहूलियत प्राप्त होगी। आपातकालीन परिस्थितियों में एंबुलेंस और राहत दलों की पहुंच भी सुनिश्चित होगी।
उल्लेखनीय है कि वर्षों से कई गांव ऐसे रहे हैं जहां वर्षा ऋतु में भारी परेशानियों का सामना करना करना पड़ता था। गर्भवती महिलाओं, गंभीर मरीजों और स्कूली बच्चों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब पक्की एवं टिकाऊ सडक़ों के निर्माण से इन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।
डीएमएफ मद से बदलेगी जिले के वनांचल क्षेत्रों की तस्वीर
32 करोड़ की लागत से बन रही 14 सडक़े, कलेक्टर ने किया स्थलीय निरीक्षण



