रायपुर। बहुचर्चित भारतमाला भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक डिप्टी कलेक्टर और एक तत्कालीन नायब तहसीलदार को गिरफ्तार किया है। दोनों पर पद का दुरुपयोग कर फर्जी मुआवजा पत्रक तैयार करने और शासन को लगभग 43 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, मामला दर्ज होने के बाद दोनों अधिकारी फरार हो गए थे। विशेष टीम द्वारा लगातार निगरानी और तलाश के बाद 11 फरवरी को दोनों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उनसे विस्तृत पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार अधिकारियों में डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे घटना के समय अभनपुर के तहसीलदार, वहीं लखेश्वर प्रसाद किरण गोबरा नवापारा में नायब तहसीलदार थे।
ईओडब्ल्यू द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि भारतीय दंड संहिता की धाराएं 467, 468, 471, 420, 409, 120बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7सी और 12 के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध है। जांच में सामने आया है कि रायपुर-विशाखापट्नम एवं दुर्ग बायपास भारतमाला परियोजना के तहत सडक़ निर्माण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में गंभीर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने अपने अधीनस्थ पटवारियों, राजस्व निरीक्षकों, भूमाफिया और अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। कूटरचित राजस्व अभिलेख तैयार कर या करवाकर प्रभावित भू-स्वामियों को वास्तविक मुआवजे से कई गुना अधिक राशि दिलाई गई। इस प्रक्रिया में शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
ईडी भी कर रही समानांतर जांच
इस बहुचर्चित मामले की जांच केवल ईओडब्ल्यू तक सीमित नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी वित्तीय लेन-देन और कथित मनी ट्रेल की जांच कर रहा है। माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान अन्य लोकसेवकों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। भारत माला परियोजना देश की प्रमुख आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल ईओडब्ल्यू की टीम दोनों आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और वित्तीय प्रवाह की कडिय़ों को जोडऩे में जुटी हुई है।



