रायगढ़। जेपीएल द्वारा जनसुनवाई का आवेदन वापस लिए जाने की घोषणा के बाद तमनार में पिछले 17 दिनों से जनसुनवाई के विरोध में जारी धरने का मामला अब ग्रामीणों की मांग पूरी होने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। जनसुनवाई निरस्त करने की दिशा में प्रशासन के आगे बढऩे के बाद अब कंपनी प्रबंधन ने भी यु टर्न लेते हुए जनसुनवाई निरस्त करने की दिशा में जनाक्रोश को देखते हुए कदम बढ़ाये हैं।
रविवार को जहां गारे-पेलमा सेक्टर 1 कोल माइंस से प्रभावित 14 गांव के ग्रामीणों के बेमियादी धरना आंदोलन का आदर करते हुए कलेक्टर ने जनभावनाओं के अनुरूप जनसुनवाई निरस्तीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी थी और अपनी ओर से अनुशंसा पत्र पर्यावरण मंत्रालय रायपुर के सचिव की ओर प्रेषित कर दिया था तो वहीं सोमवार की दोपहर जिंदल पॉवर लिमिटेड ने भी जन आंदोलन के सामने झुक गया। और जनसुनवाई के लिए दिये गये आवेदन को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। जेपीएल प्रबंधन ने कहा कि जब तक ग्रामवासी नहीं चाहेंगे, ये जनसुनवाई नहीं होगी।
जेपीएल को आवंटित गारे-पेलमा सेक्टर 1 कोल माइंस के लिए कथित तौर पर हुई फर्जी जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग को लेकर प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर से सीएचपी चौक पर धरने पर बैठे थे। इस बीच 27 दिसंबर को स्थिति उस समय विस्फोटक हो गई जब प्रदर्शनकारी अचानक से उग्र हो गये और पथराव, आगजनी तक की घटना को अंजाम दे दिया जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति निर्मित हो गई और पुलिस प्रशासन को वहां भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ गया। कलेक्टर और एसपी खुद मौके पर डटे रहे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनसे इस गतिरोध को दूर करने का प्रयास करते रहे। इस कड़ी में रविवार को उस समय एक उम्मीद की किरण जगी जब ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस-प्रशासन के साथ मिलकर बातचीत की और उन्हें अपनी मंशा से अवगत कराया। ग्रामीणों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उनका यह आंदोलन तभी खत्म होगा जब जनसुनवाई को निरस्त करने का आदेश जारी किया जायेगा। इस वार्ता के बाद ग्रामीणों की मांग के अनुरूप कलेक्टर ने भी जनसुनवाई निरस्तीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी और आवेदन पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय रायपुर के सचिव की ओर प्रेषित कर दिया मगर इसके बाद भी ग्रामीणों के आंदोलन जारी रहा क्योंकि ग्रामीण तब तक मैदान में डटे का ऐलान कर दिया था जब तक जनसुनवाई निरस्त होने का आदेश जारी नहीं हो जाता। ऐसे में पिछले 17 दिनों से जारी धरना आंदोलन और पिछले तीन दिनों से बनी तनाव की स्थिति के बीच आखिरकार जिंदल प्रबंधन को भी झुकना पड़ गया।
सोमवार दोपहर अचानक से जेपीएल के अधिकारियों ने इस मामले को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की और जन भावनाओं के अनुरूप जनसुनवाई के लिए दिये गये आवेदन को वापस लेने का ऐलान कर दिया। जेपीएल के एमडी पी के मिश्रा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि जिंदल ग्रुप जनभावनाओं का सदैव ही आदर करता रहा है और यहां पर भी परिस्थितियों को देखते हुए कंपनी जनसुनवाई के आवेदन को वापस लेने का निर्णय लिया है। कंपनी ने आश्वस्त किया है कि जब तक ग्राम वासियों का इस संदर्भ में समर्थन नहीं रहेगा तब तक वे इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं करेंगे। अगर भविष्य में जन भावनाएं इसके प्रति अनुकूल रहेगा तब कंपनी जनसुनवाई के लिए पुन: आवेदन प्रस्तुत करेगी। जेपीएल के इस फैसले के बाद जिला और पुलिस प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। उम्मीद जतायी जा रही है कि कंपनी के इस निर्णय के बाद वहां जारी गतिरोध भी अब जल्द खत्म हो जायेगा।
जनसुनवाई का आवेदन वापस लेगी जेपीएल
जनआक्रोश के आगे जेपीएल भी झुका



