रायगढ़। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य में धान खरीदी का अंतिम दौर जारी है और जैसे-जैसे यह तिथि नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे किसान अपना धान बेचने के लिये टोकन लेने के बाद मंडियो तक पहुंच तो रहे हैं, लेकिन कथित तौर पर जारी एक आदेश के कारण किसानों को दोहरी समस्या से जूझना पड़ रहा है। जिसमें मंडी तक पहुंचने वाले किसानों को यह कहकर लौटाया जा रहा है कि वे दोपहर 1 बजे के बाद पहुंचे हैं और दूसरी उनकी देर से आने की बात को अनसुनी कर दिया जाता है।
जानकारी के अनुसार ग्राम टारपाली सहित आसपास के धान खरीदी केन्द्रो में बीते एक सप्ताह से किसान इसी परेशानी के संबंध में बताते हैं कि नियमानुसार टोकन लेने के बाद भी जब मंडी तक अपना धान टेऊक्टर में लादकर पहुंचते हैं तब संबंधित धान खरीदी केन्द्र में तैनात समिति प्रबंधक के अलावा उनके अधिनस्थ कर्मचारी यह कहकर किसानों को वापस लौटा देते हैं कि वे मंडी के अंदर एक बजे के बाद प्रवेश कर रहे हैं। कडक़ड़ाती ठंड में सुबह से ही अपना धान टेऊक्टरों में लदवाने वाले किसान इस समस्या के बारे में बताते हैं कि सुबह-सुबह वे पूरी तैयारी के साथ बकायदा धान की बोरियों को गिन कर रखवाते हैं और इस दौरान बोरियों को टेऊक्टर में चढ़ाने के अलावा धान को व्यवस्थित ढंग से ले जाने के लिये सभी व्यवस्था करते हैं और ऐसे में मंडी पहुंचते तब पांच से दस मिनट लेट हो जाता है और इसका महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि कुछ मंडिया गांव से दूर है, जिसकी समस्या किसानों को ही झेलनी पड़ती है।
पीडि़त किसान बताते हैं कि धान खरीदी केन्द्र में सुबह-सुबह जब कुछ किसान पहुंचते हैं तो उन्हे नमी का बहाना करके वापस लौटा दिया जाता है वहीं कुछ किसान दोपहर 1 बजे के बाद मात्र दस मिनट लेट होते हैं तो उन्हें भी वापस जाने के लिये फरमान जारी किया जाता है। किसानों का कहना है कि इस अंगे्रजी फरमान के कारण उन्हें मंडी तक धान लाने के लिये ट्रांसपोर्टिंग व हमाल का चार्ज झेलना पड़ता है और वापस घर जाने की बात सुनने के बाद उन्हें ऐसा लगता है कि वे सरकार की धान नही खरीदने की नीयत के कारण दोहरी परेशानी जूझना पड़ेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में हमने जिले के कई अधिकारियों से बात करनी चाही, लेकिन किसी ने जवाब देना दूर मोबाईल तक नही उठाया, ऐसे में जिला खाद्य अधिकारी चितरंजन सिंह ने जब चर्चा हुई उनका कहना था कि उनके पास भी कुछ किसानों के फोन ग्राम टारपाली सहित अन्य जगहों से आये हैं और अगर किसान पांच से दस मिनट लेट होता है तो उनका धान वापस लौटाने का कोई आदेश नही है। ऐसे में खाद्य अधिकारी की बात सही है तो धान खरीदी केन्द्रो में मनमानी करने वाले समिति प्रबंधक व उप प्रबंधक के उपर किसका हाथ है जो नये फरमान के कारण किसानों को वापस लौटने का फरमान जारी कर रहे हैं।
देरी से आने को लेकर धान खरीदी से कर रहे इंकार
अंचल के किसान जूझ रहे दोहरी समस्या से



