रायगढ़। संयमित जीवन जीने वाला व्यक्ति दीर्घायु होता है। हर व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता उसका स्वास्थ्य होना चाहिए इसके विपरीत लोग स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होते जा रहे है। जैसे मुसीबत आने पर व्यक्ति भगवान को याद करता है वैसे ही बीमार होने पर ही स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की चेतना जागृत होती है। उक्त बाते पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी ने डॉक्टर दुलीचंद के निवास स्थान पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कही। इस दौरान डॉक्टर दुलीचंद की धर्मपत्नी विमला देवी पुत्र सुनील कुक्कू,अनिल चीकू निखिल डॉ दुलीचंद के पुत्री-पौत्रों के साथ भाइयों,परिजनों, रिश्तेदारों की मौजूदगी रही। उपस्थित जनमानस से आग्रह करते हुए कहा आज के समय में स्वयं को स्वस्थ रखना सबसे बड़ी चुनौती है स्वस्थ रहने के लिए जल्दी सोना और सुबह उठना आवश्यक है। इसके विपरीत आज की पीढ़ी विलंब से सोती है और विलंब से उठती है। पूज्य श्री ने बिगड़ती जीवन शैली पर चिंता व्यक्त भी की। संसार में आने वाला हर व्यक्ति अपनी सांसे पूरी कर वापस जाता है लेकिन संयमित जीवन जीने वाले व्यक्ति दीर्घायु को प्राप्त होता है। पूज्य पाद ने कहा धन के नुकसान की भरपाई समय रहते की जा सकती है लेकिन स्वास्थ्य की भरपाई करना मुश्किल है।आहार विहार को संतुलित करने की अवश्यकता जताते हुए बाबा प्रियदर्शी राम ने कहा स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही से आने वाली पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय होगा। हर मनुष्य को नियम बद्ध होने की आवश्यकता जताते हुए कहा जैसे ईश्वर के सुमिरन मात्र से मुसीबतों को टाला जा सकता है उसी तरह प्रतिदिन योग प्राणायाम कर स्वयं को निरोगी रखा जा सकता है। मात्रा का महत्व पर प्रकाश डालते हुए बाबा ने कहा उपभोग के दौरान मात्रा के संतुलन का ध्यान देना आवश्यक है । मात्रा की अधिकता का असर विष की तरह होती है। संतुलित मात्रा का अमृत की तरह लाभ होता है। पूज्य बाबा ने डॉक्टर दुलीचंद की आत्म शांति की प्रार्थना करते हुए कहा भगवान परिवार जनों को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
विष्णु महाराज के घर पहुंचकर दी श्रद्धांजलि




