खरसिया। खरसिया के मदनपुर में चल रही साप्ताहिक राम कथा महोत्सव के छठे दिन की कथा में अवध धाम से पधारे श्रीराम दत्त त्रिवेदी पुत्री रसिक साध्वी उमा जी के मुखारविंद से श्री राम वन गमन तथा भरत चरित्र की अलौकिक कथाओं का वर्णन अपनी सुमधीर वाणी में किया। जब भगवान श्रीराम पिता की आज्ञा से वन की ओर जा रहे थे, उसी समय अयोध्या से भरत गुरु वशिष्ठ, माताओं और प्रजाजनों के साथ उन्हें मनाने चित्रकूट पहुँचे।
भरत ने श्रीराम को देखते ही उनके चरणों में गिरकर विलाप किया और कहा कि राज्य का अधिकारी आप ही हैं। श्रीराम ने भरत को उठाकर हृदय से लगाया और समझाया कि पिता की आज्ञा का पालन ही उनका धर्म है। भरत ने राज्य स्वीकार करने से इंकार करते हुए राम की खड़ाऊँ माँगी और उन्हें सिंहासन पर रखकर स्वयं सेवक बनकर अयोध्या लौटे।
प्रेम मगन भरत रामहि देखी।
गिरि पड़े चरण रज नयनन्ही लेकी॥
भरत बिकल बिलपहि अति बानी।
राम प्रेम बस भए अज्ञानी॥
इसी प्रकार से और भी अच्छे सुंदर शब्दों में व्यास जी महाराज ने सभी लोगों को भरत चरित्र का वर्णन सुनाया। श्रीराम कथा के मुख्य यजमान श्रीमती कामता प्रसाद शर्मा, ब्रिजेश शर्मा, राजेश शर्मा के तत्वाधान में संपन्न हो रहा है। आज कथा श्रवण हेतु छाया विधायक महेश साहू भी पहुंचे रामभरत मिलाप की कथा से भावुक होते हुए कथा व्यास से आशीर्वाद लिया और क्षेत्र की उन्नति प्रगति और खुशहाली की कामना की। महेश साहू के साथ शशिकांत राठौर रितेश सोनू द्विवेदी कैलाश शर्मा मोहन गवेल नितेश बरेठ उपस्थित रहे।
श्री राम कथा महोत्सव छठवां दिवस भरत चरित्र का वर्णन
साथियों सहित महेश साहू पहुँचे रामकथा में



