बिलाईगढ़। छग सरकार भले ही किसान हितैषी होने की दावा करती है और किसानों को धान खरीदी मे कोई समस्या नहीं होने देने की बात पे उनके लिए छाया पानी इत्यादि सुविधाएं प्रबंध करने पर जोर देती है। जहाँ एक तरफ सारंगढ़ कलेक्टर भी प्रत्येक सप्ताह बैठक मे सही धान खऱीदने, ढाला कर के उचित नमी की धान क्रय करने की हिदायत नोडल एवं प्रबंधकों को देते रहते हैँ पर सलिहा में प्रबंधक, नोडल किसानों को सुविधा देना दूर उनको प्रताडि़त करने से भी नहीं चूक रहे। ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया कि एक तरफ प्रबंधक गरीब किसानों से धान भराई और तौलाई कराता है तो कुछ बाहुबली नेताओं को घर मे धान भरके लाने छूट दीजाती है जो शाम को आकर सीधे वाहन से धान को मंडी ला कर स्टेक छल्ली करा देते हैँ।
इस खेल में प्रबंधक को बड़े किसानों से प्रति क्विंटल की कमीशन प्राप्त होती है और तौलाई भराई का पैसा भी बच जाता है। किसानों ने मीडिया को बताया कि प्रबंधक रामाधार मानिकपुरी हमेशा हमको ही बोरी भरने और तौलाई करने कहता है, ज़ब हमने नोडल रामग़ुलाल साहू से शिकायत किया तो आपको धान बेचना है तो खुद काम करना पड़ेगा कहा। कलेक्टर ने प्रबंधको और नोडल को स्पष्ट चेताया है की किसान के धान को पहले जमीन पर ढाला कराया जाये तत्पश्चात नमी एवं सफाई को देखते हुए धान खरीदी की जाये लेकिन अपने हित साधने एवं हमाल के पैसे को हड़पने के नियत से रामाधार मानिकपुरी बोरी से बोरी पलटी कराकर ढलाई और भराई हेतु सरकार द्वारा प्रदाय राशि को खुद के जेब मे भरने का काम कर रहा है जिसका साथ नियुक्त नोडल रामग़ुलाल साहू दे रहा है।
दरअसल सरकार प्रबंधको को धान ढाला कराने, बोरी भरने एवं तौलाई करने के साथ सिलाई एवं स्टेकिंग के लिए प्रति क्विंटल दर से पैसा देती है, जिसमे साहिला सोसाइटी मे सिर्फ सिलाई और स्टेकिंग का पैसा दिया जा रहा है और बाकी काम किसानों से करा रहे हैँ। यदि हमालों से प्रत्येक क्विंटल पर सिर्फ 6 रूपये भी प्रबंधक बचा रहा है तो यदि खरीदी 50 हज़ार क्विंटल होती होगी तो 3 लाख खुद की जेब मे और अधिक वजन के साथ सरना मोटा और घर से डायरेक्ट तौलाई कर स्टेकिंग मे लाखों का का खेल अलग। क्या कहता है नोडल राम ग़ुलाल साहू मैं विभागीय कार्र से बाहर हूं, किसान यदि खुद भराई और तौलाई कर रहा है तो उसमे क्या गलत है, किसानों को जल्दी काम कराना है तो इतना करना पड़ेगा पत्रकारों को जो लिखना है लिखने दो।
क्या कहता है प्रबंधक मानिकपुरी किसान अपने सुविधा के लिए तौलाई करते हैँ बोरी से बोरी पलटी कराने की बात गलत है। मीडिया द्वारा सबूत होने की बात कही गयी तो चुप्पी साध ली। ज़ब अभी शाम को 4 बजे कैसे वाहन मे धान आया है जबकि – 5 बजे तक नियम अनुसार धान सिलाई कर स्टेकिंग करना है बोलने पर किसान का वाहन खराब होना बताया। मीडिया द्वारा 1 घंटे से मौजूद होना किसान का नहीं होने पर सवाल किया जाता है तो शातिर प्रबंधक कोई जवाब नहीं देता। किसानों का आरोप सही है हेमंत चंद्राकर ज़ोनल अधिकारी सलिहा मंडी में विशेष निरीक्षण हेतु नियुक्त जोनल अधिकारी चंद्राकर ने दूरभाष के माध्यम से बताया कि – मैं भी सुबह निरीक्षण में गया जहाँ ढाला नहीं किया गया था, बोरी पलटी और किसान परेशान थे नोडल गायब था आप जो देखे वही मैं भी देखा, कलेक्टर को प्रतिवेदन प्रस्तुत करूंगा।
सलिहा सोसाइटी मे बोरी से बोरी पलटी का खेल



