खरसिया। खरीफ सीजन की आहट आते ही अन्नदाता एक बार फिर चेहरे पर चिंता की लकीरें लिए सोसायटियों और दुकानों के चक्कर काटने को मजबूर है। हर साल की तरह इस बार भी खाद की किल्लत, सोसायटियों में बाबू-प्रबंधकों की मनमानी और निजी दुकानदारों द्वारा की जाने वाली कृत्रिम कमी (ब्लैक मार्केटिंग) मिलावटखोरी की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। पर्दे के पीछे चल रहे इसी ‘खाद के खेल’ और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए खरसिया प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। ?अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री प्रवीण तिवारी जी की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल बैठक बुलाई गई, जिसमें खाद विक्रेताओं और सोसायटी प्रबंधकों को सीधे तौर पर ‘सुधर जाने’ की सख्त चेतावनी दी गई।
सोसायटियों का ‘सिंडिकेट’ और निजी दुकानदारों का ‘भ्रष्टाचार’ रडार पर
बैठक में जमीनी हकीकत और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर तीखी चर्चा हुई। सूत्रों की मानें तो खरसिया क्षेत्र में खाद संकट की एक बड़ी वजह सोसायटियों और निजी व्यापारियों की साठगांठ है। दूर-दराज से आने वाले गरीब किसानों को ‘स्टॉक खत्म है’ कहकर लौटा दिया जाता है, जबकि चहेतों और रसूखदारों के लिए पिछले दरवाजे से खाद निकाल दी जाती है। सरकारी सोसायटियों में पारदर्शिता की कमी और निजी दुकानों पर तय रेट से ज्यादा (ओवररेटिंग) वसूलने की शिकायतें लगातार प्रशासन तक पहुंच रही थीं। पक्का बिल न देना और बिना रसीद के मनमाने दामों पर खाद बेचना इन खाद माफियाओं का पुराना पैंतरा रहा है।
एसडीएम प्रवीण तिवारी की खुली चेतावनी
‘किसानों को अनावश्यक कतारों में खड़ा किया या तय दर से एक रुपया भी ज्यादा वसूला, तो सीधे कानूनी कार्रवाई होगी। दुकानें सील होंगी और जेल की हवा खानी पड़ेगी।’ इन कड़े नियमों का करना होगा पालन भ्रष्टाचार की इस चेन को तोडऩे के लिए एसडीएम ने कड़े फरमान जारी किए हैं। स्टॉक बोर्ड अनिवार्य: हर दुकान और सोसायटी के बाहर रोजाना सुबह यह लिखना होगा कि कितनी खाद उपलब्ध है और उसका सरकारी दाम क्या है। छुपाने का खेल अब नहीं चलेगा। निजी दुकानदारों को हर एक बोरी का पक्का बिल काटना ही होगा। स्टॉक की डेली रिपोर्ट कृषि विभाग को सौंपनी होगी। सोसायटियों में किसानों को घंटों धूप में न तपाया जाए, इसके लिए वितरण काउंटरों की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए।
खरसिया में खाद माफिया पर कसेगा शिकंजा!
एसडीएम की दो टूक : ‘किसानों को लूटा तो खैर नहीं’



