रायगढ़। कला व संस्कृति की नगरी रायगढ़ में 8 अक्टूबर 1938 को श्री ईश्वरी प्रसाद श्रीवास्तव व श्रीमती श्यामा बाई श्रीवास्तव के संतान के रूप पैदा बालक जिनका नाम राधेश्याम श्रीवास्तव था। जिन्होनें जन्म से तमाम बाधाओं को पार करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान दिये। 1958 से एक शिक्षक के रूप में रायगढ़ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा रूपी अलख जगाये रखा। कहते है नाम से प्राप्त ख्याति और कर्म से प्राप्त ख्याति के टिकाऊ पना में विशेष अन्तर है। इसी तरह श्री श्रीवास्तव सर कर्म से प्राप्त ख्याति धारक है। शिक्षा के क्षेत्र में वे केवल एक संस्था ही नहीं पूरे जिले के लिए चिंतित रहते है। अपने शिक्षक जीवन में इन्हें राष्ट्रपति पुरुष्कार से सम्मानित किया गया। जो हर शिक्षक का एक सपना होता है। 62 साल तक शासकीय सेवक के रूप में अपनी सेवाऐं देने के उपरांत भी समाज में शिक्षा के प्रसार हेतु वर्तमान में भी चिंतित रहते है। साक्षर भारत कार्यक्रम में जिले के सभी विकास खेडो में आज भी प्रेरकों के द्वारा इन्हें ‘महोदय’ की उपाधि से सम्मानित किया जाता है। 66 साल की उम्र में आज भी अपनी सक्रियता से इन्होंने अपने आप की उपस्थिति दर्ज कराते रहते है। आज इनकी जन्म दिवस पर बधारी के साथ यह कामना है कि इनके अनुभव एवं सेवाओं का लाभ समाज को सदा मिलता रहे।



