सारंगढ़। विधानसभा जो अब नए जिले के रूप में अस्तित्व आ चुका है,अब इसका अलग इतिहास बनेगा। सारंगढ़ जिला मुख्यालय प्रदेश में सुर्खियों में रहने वाला और इतिहास गढऩे वाला विधान सभा रहा है। यहां के मतदाता का निर्णय हमेशा चौंकाने वाले रहा है। सारंगढ़ हालिया कुछ चुनावों के परिणाम के आधार पर बात करें तो साल 2003 के चुनाव से परिदृश्य पर नजर डालें तो इस साल कामदा जोल्हे 2008 में पद्मा मनहर, साल 2013 में केरा बाई मनहर के बाद उत्तरी जांगड़े यहां की विधायक बनी और विधायक बनते ही बहुप्रतीक्षित जिला बनाने की मांग को पूरा करवाकर जिले की सौगात दी। भले ही इसे लेकर कई तरह के राजनीति समीकरण बने लेकिन यह भी मान्य होना चाहिए जिला के नाम पर होने वाली राजनीति परिदृश्य का पटाक्षेप हो गया और जिला बन गया। इसके बाद जिले में कई बुनियादी सुविधाओं की आधार शिला रखी। विधायक उत्तरी शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रयास किया है। जितना की इसके पूर्ववर्ती कार्यकाल में नहीं हुए वर्तमान में सारंगढ़ जिला अभी अपने शैश्वावस्था में है और इसेअभी प्रचुर मात्रा में खाद पानी की जरूरत है।
साहू धर्मशाला में जिला अध्यक्ष ब्लॉक अध्यक्ष अन्य नेताओं की उपस्थिति 2023 चुनाव लडऩे के लिए कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के रूप में डेढ़ दर्जन से अधिक दावेदारों के द्वारा फार्म भरा गया। वर्तमान विधायक उत्तरी जांगड़े के साथ गनपत जांगड़े,पद्मा,घनश्याम मनहर, जिपं सदस्य तुलसी विजय बसंत, जिपं सदस्य विलास सारथी, सरिता मल्होत्रा, जिपं सदस्य अनिका भारद्वाज, विनोद भारद्वाज, सखाराम मल्होत्रा, जपंस उज्जवल मिरी, जगदीश अजगल्ले, मंजुलता आनंद, घासीराम अजय, शिव चरण कुर्रे, शंकर चौहान, रामदयाल कुर्रे, सुभाष चंद्र चौहान, सुश्री लता कुर्रे दौड़ में शामिल हैं। फिलहाल कांग्रेस प्रत्याशी चयन को लेकर उहापोह बनी हुई है और सारंगढ़ में भावी उम्मीदवार घात लगाए बैठे हैं। कांग्रेस में एक से बढक़र एक प्रत्याशी मैदान में है यहां प्रत्याशी बनने तीन युगल जोड़ी पति पत्नी का है। लेकिन गुंजाइश ज्यादातर उत्तरी गनपत जांगड़े की है इनका बतौर कांग्रेस विधायक रिपोर्ट का प्रदर्शन अच्छा माना जाता है। अतैव इनका टिकट कटना नामुमकिन है।
फिलहाल अब सारंगढ़ का सियासी पारा सर चढक़र बोल रहा है। यहां का राजनीति इतिहास 2003 से लेकर अब तक महिला उम्मीदवार ही राजनीति के उच्च शिखर पर नाम अंकित करवा रही हैं। सारंगढ़ की सियासत पर एक नजर डालें तो जो सर्वविदित है हर वर्ष पार्टी और चेहरा बदल जाता है। इस आसन्न विधान सभा चुनाव में भी होगा ऐसा ही होगा या फिर कांग्रेस प्रत्याशी उत्तरी जांगड़े टिकिट प्राप्त करने के बाद चली आ रही मिथक को तोड़ते हुए, वायदों को पूरा करने का प्रतिसाद मतदाताओं से हासिल करने में सफल होंगी। उनकी सफलता का यह पूरा दारोमदार सारंगढ़ कांग्रेस के सियासी सेनापति अरुण मालाकार पर आकर आश्रित हो जाती है। हालांकि यहां पर भी उनके विरोधी पक्ष हर एक कमी को लपकने मुस्तैद भी हैं , जो उनके खिलाफ माहौल बनाने के लिए भी पर्याप्त हैं। क्या आने वाले समय में विरोधी गुट को एक छतरी के नीचे लाने का भी अरुण मालाकार के पास कोई तोड़ है। यहां एक बात और बताना लाजमी होगा कि – क्षेत्र में खरसिया विधायक उमेश पटेल का खासा रसूख भी है। जिसका फायदा यहां के कांग्रेसियों ने पहले भी देखा है।
भाजपा की बात करें तो यहां सबसे अग्रिम पंक्ति के दावे दारों में अरविंद खटकर है जो पिछले महीने खूब सुर्खियों में थे और भयंकर राजनीतिक चंगुल में फंसे व किसी तरह खुद को बचाया। सारंगढ़ में इस तरह की दो घटनाएं खूब सुर्खियां बटोरी और लोग इसे राजनीतिक चटकारा लेकर आनंदित होते रहे। बात सारंगढ़ में भाजपा के लिए यह वर्ष गोल्डन चांस है, जो इतिहास के अनुरूप दूसरी पार्टी और विधान सभा का नया चेहरा। सारंगढ़ में इस बार भाजपा का गुनाभाग कुछ और ही बता रहा है इस बार भाजपा सारंगढ़ से महिला की जगह पुरुष प्रत्याशी की खबर अंदर खाने से निकल कर बाहर आ रही है। हालाकि पुरुष प्रत्याशी में और भी हैं जिनमें हरिनाथ खूंटे, दीनानाथ खूंटे, और देवेंद्र रात्रे दावेदारी कर रहे हैं वहीं महिला प्रत्याशी में शिव कुमारी चौहान, मीरा जोल्हेे, देवकुमारी जोल्हे है सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले में भाजपा की सियासी समीकरण कुछ ऐसी बन रही है की इस बार भाजपा सारंगढ़ विधान सभा में महिला प्रत्याशी की जगह पुरुष प्रत्याशी का गणित बैठा रहा है। इस लिहाज से तमाम दावेदारों में अरविंद खटकर ही सबसे चर्चित चेहरा नजर आ रहे हैं। अन्य प्रत्याशियों की राजनीतिक परिदृश्य पर नजर डालें तो हरी नाथ और दीनानाथ खूंटे दोनों पूर्व में सरपंच चुनाव लड़ कर हार चुके है , यानि क्षेत्र में जनाधार का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब अगर दूसरे पुरुष प्रत्याशी देवेंद्र रात्रे की तो इनकी अब तक की राजनीतिक सफर हमेशा सुर्खियों में रहा करती है।
इनके पिता श्याम सुंदर रात्रे से लेकर तुलसी रात्रे को भाजपा ने हमेशा संरक्षण दिया और जब भी मौका मिला कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया। 2010 -15 की बात करें तो सारंगढ़ जप में कांग्रेस से साठगांठ कर तुलसी रात्रे ने उस समय कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई। जब एससी खेमे से एक भी महिला प्रत्याशी की जीत नहीं हुई थी। भाजपा नेत्री तुलसी रात्रे अध्यक्ष बनी और यही से साल 2010 में यहां कांग्रेस का गिरता ग्राफ और अरुण मालाकार की राजनीतिक कैरियर को एक बार फिर से पंख लगा और सारंगढ़ की राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर से अरुण मालाकार राजनीतिक के माहिर खिलाड़ी के रूप में उभरे और साथ ही कई सियासी विरोधी भी पैदा किए।
इसलिए ज्यादा गुंजाइश ये भी है की भाजपा इस बार यहां रणनीति के तहत किसी पुरुष प्रत्याशी पर दांव लगाने की राह पर चलती दिखाई दे रही है। दावेदारों की फेहरिस्त पर नजर डालें तो भाजपा के तमाम दावेदारों में अरविंद खटकर ही एकमात्र चेहरा दिखाई दे रहे हैं। भाजपा इतिहास को भी बखूबी समझ रही है। इसलिए प्रत्याशी चयन में खास तवज्जो दे रही है। सारंगढ़ के दिग्गज भाजपा नेता अजय गोपाल, रामकृष्ण नायक, जिला भाजपा अध्यक्ष सुभाष जालान, अमित रिंकू तिवारी जैसे क्षेत्र के दिग्गज नेताओं का अरविंद खटकर को साथ मिला हुआ है। ऐसी चर्चा राजनीतिक गलियारों में बनी हुई है। अरविंद खटकर यूं तो पूर्व में बसपा से जुड़े हुए थे इसके बाद भी जब भी जरूरत पड़ी किसी अन्य पार्टी की जगह भाजपा के साथ खड़े नजर आए। साल 2015 में भी जिला पंचायत की सरकार बनाने में भाजपा का साथ दिया और जिला पंचायत में भाजपा की पंचवर्षीय सरकार रही। लोक सभा चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी का समर्थन किया और क्षेत्र से गोमती साय को जीत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाया और कालांतर में पूरी तरह से भाजपा के हो गए थे। इस तमाम राजनीतिक परिदृश्य पर गौर करें तो इस साल अरविंद खटकर को भाजपा बतौर विधान सभा प्रत्याशी बनाकर सहयोग का इनाम दे सकती है।
उत्तरी जांगड़े 2023 इतिहास दोहराएंगी या बदलेगा समीकरण
* कांग्रेस में अरुण मालाकार राजनीति के चाणक्य * भाजपा से अरविंद खटकर हैं प्रबल दावेदार
