रायगढ़। झारसुगुड़ा जिले के कंधाहिकेला निवासी संजय बारिक को 17 अगस्त 2026 की तडक़े करीब 3 बजे करैत सांप ने दाहिनी पिंडली में काट लिया। सर्पदंश के बाद उनकी हालत बिगडऩे पर परिजन उन्हें उपचार के लिए डॉ. आर.एल. हॉस्पिटल एवं टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर, रायगढ़ लेकर पहुंचे।
अस्पताल में जांच के दौरान मरीज में सर्पदंश के कारण न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव पाया गया। इसके चलते उन्हें पलक झुकने (क्कह्लशह्यद्बह्य) की समस्या भी हुई। चिकित्सकों ने तत्काल आवश्यक उपचार शुरू करते हुए उन्हें लगातार निगरानी में रखा। उपचार के दौरान मरीज को चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार फिजियोथेरेपी भी कराई गई, जिससे उनकी शारीरिक स्थिति में सुधार लाने में मदद मिली। करीब दस दिनों तक चले उपचार और निगरानी के बाद मरीज की हालत में लगातार सुधार हुआ। 27 अगस्त 2026 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डिस्चार्ज के समय मरीज की स्थिति स्थिर एवं आरामदायक थी। चिकित्सकों ने उन्हें पांच दिन बाद फॉलो-अप जांच के लिए अस्पताल आने की सलाह दी। अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि सर्पदंश के मामलों में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। विशेषकर न्यूरोटॉक्सिक सर्पदंश में मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी और आवश्यकतानुसार उपचार देना जरूरी है। लोगों को सलाह दी गई कि सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाएं।
करैत के सर्पदंश से बिगड़ी हालत, उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौटा मरीज
डॉ. आर.एल. हॉस्पिटल में 10 दिन चला उपचार, न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव के बाद फिजियोथेरेपी से भी मिली मदद



