रायपुर। इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने वाला है। जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है। वैसे यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा फिर भी ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण का असर पूरे विश्व पर माना जाता है। ऐसे में इसका असर राशियों प्रकृति और वैश्विक परिस्थितियों पर देखने को मिल सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कभी सूर्य ग्रहण होता है उसका असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता जहां वह दिखाई देता है।बल्कि यह संपूर्ण पृथ्वी के माहौल और ऊर्जा पर इसका प्रभावी डालता है।
यह ग्रहण 12 अगस्त की रात्रि 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक समाप्त होगा। इस तरह यह ग्रहण लगभग साढ़े 7 घंटे तक प्रभावी रहेगा। यह एक कंकणाकृति यानी वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा जिसमें चंद्रमा सूर्य को इस तरह ढकता है कि उसके चारों ओर एक चमकती हुई अंगूठी जैसी आकृति दिखाई देती है। पंचांग के अनुसार यह ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा, जिसे संवेदनशील और परभावशाली स्थिति माना जाता है। यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा यह लेकिन यूरोप के कई देश कनाडा रूस के उत्तर-पूर्वी हिस्से ग्रीनलैंड, आइसलैंड और अटलांटिक महासागर के हिस्सों में इसे अलग-अलग रूपों में देखा जा सकेगा। कुछ जगह पर यह वलयाकार तो कुछ स्थानों पर खंडग्रास और खग्रास रूप में दिखाई देगा।
धार्मिक मान्यता रहती है सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले लग जाता है। लेकिन इस बार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा है इस कारण यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिरों के पट बंद करने या विशेष परहेज की आवश्यकता नही रहेगी यह ग्रहण कर्क राशि में लग रहा है इसलिए यह जल तत्व से जुड़ा माना जाता है इसमें मौसम में बदलाव, समुद्री हलचल, वर्षा के पैटर्न में बदलाव जैसे प्रभाव संभव माने जा रहे हैं।इसके अलावा यह समय मानसिक अस्थिरता निर्णय लेने में भरम और कुछ देशों में राजनीतिक या आर्थिक उतार-चढ़ाव का संकेत भी दे सकता है। ऐसे समय में संयम धैर्य और सकारात्मक सोच बनाए रखना फायदेमंद होग। ग्रहण भले ही भारत में दिखाई न दे फिर भी इस समय ध्यान जप और भगवान शंकर या सूर्य देव की आराधना करना शुभ समय होगा। यह समय आत्मचिंतन और नकारात्मकता से दूर रहने के लिए उपयुक्त होने वाला है।
12 अगस्त लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण



