रायगढ़/पतरापाली। जिंदल वार्ड क्रमांक 44 को परिसीमन के दौरान नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत शामिल तो कर लिया गया।परन्तु निर्माण कार्यों को लेकर लगातार बरती जा रही लापरवाही को लेकर वार्ड पार्षद की शिकायत भी नजरंदाज की जाती रही है।आलम ये है कि 32 लाख रुपए की लागत से निर्मित नाला में जहां निर्माण के चंद महीनों बाद ही जगह जगह दरारे पड़ गई।वही 12 लाख की सडक़ निर्माण के महज 12 घंटे बाद ही अपने गुणवत्ताविहीन निर्माण की कहानी बया करने लगी है। गौरतलब हो कि परिसीमन के दौरान ग्राम पंचायत पतरापाली को निगम क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 44 बनाकर शामिल किया गया था।जहां पूर्व में ही यहां के रहवासियों की मांग पर अप्रैल माह में 32 लाख रुपए की लागत से बड़े नाला का निर्माण जलभराव की समस्या दूर करने निर्माण कराया गया था।परन्तु वर्तमान में गुणवत्ताविहीन निर्माण की वजह से महज 4 माह बाद ही जगह जगह दरारे पड़ गई।जिसकी शिकायत पार्षद प्रतिनिधि द्वारा सुशासन तिहार से लेकर निगम प्रशासन तक के समक्ष रखी गई।वही उक्त कार्य में संबंधित निर्माण ठेकेदार का भुगतान रोकने एवं ब्लैक लिस्टेड करने की मांग भी की गई।शिकायत के आधार पर संबंधित ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने की बात तो बताई जा रही है।परन्तु 32 लाख रुपए भुगतान के संबंध में अब भी वार्ड पार्षद को अनभिज्ञ रखा गया है।इसके अलावा विद्युत फीडर को लेकर भी यहां भारी अव्यवस्था देखने को मिल रही है।बताया जा रहा है कि पतरापाली में सब स्टेशन होने के बावजूद भी जिंदल हॉस्पिटल सहित वार्ड के लगभग 150 घरों की विद्युत सप्लाई खैरपुर पंचायत से की जा रही है।जिसका दुष्परिणाम आयदिन वार्डवासियों को बिजली गुल के रूप में भुगतना पड़ रहा है।जिसकी शिकायत सुशासन तिहार में वार्ड पार्षद प्रतिनिधि के माध्यम से संबंधित विभाग एवं सुशासन तिहार में की गई।जिसका आज पर्यंत निवारण नहीं किया जा सका है।वही वार्ड के सफाई व्यवस्था की बात करे तो यहां कचरे की निकासी तो नालियों से हो रही है।परन्तु उसके उठाव को लेकर वार्ड में कोई सफाईकर्मी मौजूद नहीं है। नतीजन जगह जगह कचरों का ढेर और गंदगी निगम प्रशासन के स्वच्छ रायगढ़ की पोल खोलते नजर आते है।
12 लाख की सडक़ में सीमेंट का टोटा
कुछ समय पूर्व ही वार्ड क्रमांक 44 में 12 लाख रुपए की लागत से निर्मित होने वाली सडक़ का भूमिपूजन महापौर द्वारा किया गया था।जिसका निर्माण भी द्रुतगति से किया गया।परन्तु निर्माण की जल्दबाजी में यह सडक़ निर्माण के 12 घंटे बाद ही भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गया।बताया जा रहा है।की जहां सडक़ की ऊंचाई 6 इंच रखा जाना था।वहां महज 4 इंच मोटी सडक़ बनाकर पेटी ठेकेदार द्वारा अपनी जवाबदारी से पल्ला झाड़ लिया गया। यही नहीं उक्त निर्माण में कई स्थानों पर तो महज 3 इंच सडक़ ढलाई कर ही काम चला लिया गया।नतीजा सडक़ पर जलभराव को रूप में दिखाई पड़ रहा है।मिली जानकारी के मुताबिक रायगढ़ के जिस ठेकेदार को कार्य का टेंडर दिया गया था।उसके द्वारा उसे पेटी कॉन्ट्रेक्ट में दे दिया गया।यही नहीं निर्माण की गुणवत्ता ऐसी की सडक़ ढलाई में सीमेंट का टोटा दिखाई पड़ता है।
सब इंजीनियर को गुणवत्ताविहीन निर्माण की शिकायत पर नहीं दिलचस्पी
वार्ड में निर्मित सडक़ में लगातार बरती गई अनियमितता को लेकर न केवल पार्षद प्रतिनिधि के माध्यम संबंधित इंजीनियर को इसकी सूचना दी गई।बल्कि गलत निर्माण की वजह से 4 मर्तबे काम भी बंद करवाया गया।बावजूद इसके संबंधित वार्ड के इंजीनियर द्वारा न तो शिकायत पर ध्यान दिया गया।और न ही गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्य के जांच को लेकर कोई जहमत उठाई गई।जिसका खामियाजा एक बार फिर वार्डवासियों को घटिया सडक़ के रूप में भुगतना पड़ेगा।
पेटी कॉन्ट्रेक्ट और निगरानी पर भी सवाल
वार्डवासियों का आरोप है कि जिस ठेकेदार को कार्य आवंटित किया गया था, उसने निर्माण कार्य पेटी कॉन्ट्रेक्ट के माध्यम से दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया। वहीं निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी करने वाले अधिकारियों ने भी गंभीरता नहीं दिखाई। शिकायत में संबंधित सब इंजीनियर और निगम के जिम्मेदार कर्मचारियों पर समय रहते जांच नहीं करने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि सडक़ निर्माण में अनियमितताओं की जानकारी कई बार संबंधित सब इंजीनियर को दी गई। इतना ही नहीं, गुणवत्ता को लेकर चार बार निर्माण कार्य भी रुकवाया गया, लेकिन इसके बावजूद न तो निर्माण की जांच कराई गई और न ही किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई की गई।



